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हजारीबाग कोविड वार्ड में 57 मरीज भर्ती है
हजारीबाग: झारखंड में एक ओर तेजी से कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है, वहीं दूसरी ओर कोविड अस्पताल में सुविधाओं के अभाव के कारण मरीज और उनके परिजन खासे परेशान है.
वहीं कोविड अस्पताल में ड्यूटी में कार्यरत डॉक्टर तथा चिकित्साकर्मियों में भी सुविधाओं की कमी को लेकर रोष देखा जा रहा है.इसी क्रम में हजारीबाग मेडिकल कॉलेज स्थित कोविड वार्ड में भर्ती मरीज आज भूख हड़ताल पर चले गए हैं.
कोविड वार्ड में कथित तौर पर व्याप्त अव्यवस्था और मुकम्मल इलाज नहीं किए जाने के आरोप में मरीजों ने सुबह का नाश्ता और दोपहर का भोजन खाने से इनकार कर दिया, हालांकि उन्हें मनाने की कोशिश लगातार जारी है.
भूख हड़ताल पर बैठे मरीजों का कहना है कि जब तक हालत नहीं सुधरती, वे खाना नहीं खाएंगे. वे अस्पताल के अधिकारियों के खिलाफ सीधी कार्रवाई की मांग पर अड़े हैं. कई मरीज अस्पताल के कॉरीडोर में निकल आए हैं. वे प्रंबधन और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी भी कर रहे हैं.
इस बीच अधिकारियों ने बातचीत के जरिए मरीजों को समझा लिया है. जिला प्रशासन और अस्पताल के कई अधिकारी कोविड वार्ड पहुंचे हैं. कोविड वार्ड में 57 मरीज भर्ती हैं.
एचएमसीएच के अधीक्षक डॉ संजय कुमार सिन्हा का कहना है कि अस्पताल में सुविधाएं बहाल है और उपचार भी नियम प्रावधान के तहत किया जा रहा है. मरीजों की संख्या में वृद्धि हुई है, इसलिए सफाई की समस्या हो सकती है, इसके बाद भी तीन बार साफ- सफाई कराया जा रहा है.
उन्होंने कहा कि उपचार सही हो रहा है, तभी तो दो सौ मरीज ठीक होकर घरों को लौट गए हैं. मरीजों की कोई परेशानी है, तो उनसे बातचीत की जाएगी.
इधर मरीजों के विरोध प्रदर्शन के समर्थन में कांग्रेस ओबीसी के एक नेता भी अधिकारियों और डॉक्टरों के खिलाफ मुखर हो गए हैं, उनका इलाज भी कोविड वार्ड में चल रहा है.
उन्होंने बयान जारी कर आरोप लगाया है कि मरीजों का सही उपचार के बदले परेशान किया जा रहा है, कई मरीज बीस दिनों से भर्ती हैं, लेकिन रिपोर्ट के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं दी जा रही है.
आरोप यह भी है कई ऐसे मरीज हैं जिन्हें कोरोना नहीं होने के बावजूद भी कोविड-वार्ड में भर्ती कर दिया जाता है. उस मरीज की जब जांच रिपोर्ट निगेटिव आती है, तो आनन-फानन में उसे जनरल वार्ड में शिफ्ट किया जाता है. कई मौके पर गंभीर रूप से बीमार मरीज को भी ऑक्सीजन कम पड़ने पर खुद से सिलेंडर उठाकर लाना और ले जाना पड़ता है.
मरीजों का आरोप है कि सरकार के गाइडलाइन के अनुरूप भोजन भी नहीं दिया जा रहा है. वार्ड में साफ सफाई पर ध्यान नदीं दिय जाता है. रात में मरीज अंधेरे में शौचालय का उपयोग करने को बाध्य हैं. एक बल्ब की भी व्यवस्था नहीं की जाती. वार्ड में लावारिस कुत्ते भी घुस जाते हैं.

