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क्वारंटाइन सेंटर में सुविधाओं का घोर अभाव, नारकीय जीवन जी रहे लोग: दीपक प्रकाश

by bnnbharat.com
May 24, 2020
in समाचार
क्वारंटाइन सेंटर में सुविधाओं का घोर अभाव, नारकीय जीवन जी रहे लोग: दीपक प्रकाश
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रांची: भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश ने राज्य सरकार पर प्रवासी मजदूरों के जीवन के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश के अधिकांश क्वारंटाइन सेंटर में बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है जिसके कारण वहां रह रहे प्रवासी मजदूर, श्रमिक नारकीय जीवन जीने को मजबूर है.

उन्होंने कहा कि पंचायत भवनों में चल रहे अधिकांश क्वारंटाइन सेंटर में न तो समुचित शौचालय की व्यवस्था है न ही बिजली और पानी की. महिला और पुरुष एक ही शौचालय में जाने को विवश है.

स्वच्छता जो इस महामारी में सर्वाधिक महत्वपूर्ण है उसका कोई ख्याल नहीं रखा जा रहा. न तो समुचित बेड है न ही मच्छरदानी की सुविधा. इससे ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार के अधिकारियों ने इस विषय पर कोई गंभीर प्रयास नहीं किये, जिसका दुष्परिणाम गरीबों को उठाना पड़ रहा है.

घरों से मंगा रहे भोजन प्रकाश ने कहा कि गरीब मजदूर प्रवासी भोजन व्यवस्था से परेशान होकर घरों से भोजन मंगाकर खाने को विवश हैं. अधिकांश सेंटर में क्षमता से ज्यादा लोगों को रख दिया गया है जिसके कारण सोशल डिस्टेंसिंग का भी मजाक उड़ाया जा रहा.

जोन का नहीं रखा जा रहा ख्याल

प्रकाश ने कहा कि क्वारंटाइन सेंटर पर हेल्थ गाइडलाइन का अनुपालन नहीं हो रहा. रेड जोन से आये लोगों में संक्रमण का ज्यादा खतरा संभावित है, इसलिये ऐसे जोन से आये लोगों को अलग क्वारंटाइन करना था जबकि सरकारी व्यवस्था ने सब को मिला दिया है जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ता ही जा रहा.

दुखद स्थिति यह है कि लोगों को जांच आदि के अभाव में समय सीमा से ज्यादा क्वारंटाइन में रहने को मजबूर किया जा रहा है.अव्यवस्था और असुविधा से विवश लोग सेंटर छोड़ भागने को मजबूर हैं.

दीदी किचेन बना मजाक

प्रकाश ने कहा कि दीदी किचेन केवल दिखावे की व्यवस्था बनके रह गई है. ग्रामीण क्षेत्रों में कही भी इसके माध्यम से समुचित भोजन नहीं कराया जा रहा. इसके लिये प्रति थाली सरकार ने 60 रुपये की राशि सुनिश्चित की है परंतु कही भी इसका अनुपालन नहीं हो रहा.

अधिकांश जगहों पर कुछ लोगों को भोजन कराकर इसे बंद कर दिया जाता है. उन्होंने मांग किया कि इसकी जांच होनी चाहिये, क्योंकि व्यवस्था से जुड़े लोग गरीबों का निवाला छीन रहे हैं.

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