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मधुबनी के लाल चतुरानन मिश्र वृद्धावस्था पेंशन व्यवस्था के रहे जनक, राष्ट्रीय फसल बीमा योजना की शुरुआत

by bnnbharat.com
October 7, 2020
in समाचार
मधुबनी के लाल चतुरानन मिश्र वृद्धावस्था पेंशन व्यवस्था के रहे जनक, राष्ट्रीय फसल बीमा योजना की शुरुआत
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वाम दल कॉमरेड कॉमरेड के कार्यों को चुनाव में भुनाने की करेंगे कोशिश

रांची: बिहार के मधुबनी जिला के पंडौल प्रखंड अंतर्गत छोटे से गांव नाहर में जन्मे चतुरानन मिश्र द्वारा शुरू किये गये कार्यों को लेकर आगे बढ़ाने के संकल्प के साथ वामदल विधानसभा चुनाव मैदान में उतर चुके है.

संयुक्त मोर्चा सरकार में एच.डी. देवेगौड़ा और आइ.के.गुजराल के प्रधानमंत्रित्वकाल में 1996 में चतुरानाथ मिश्रा कृषि मंत्री बने. केंद्र में कृषि मंत्री रहने के दौरान के द्वारा ही देश में पहली बार राष्ट्रीय फसल बीमा योजना की शुरुआत की गयी, जबकि विधायक रहते उन्होंने वृद्धावस्था पेंशन का प्रस्ताव बिहार विधानसभा में रखा था, जिसे बाद में लागू भी किया गया. 1997 में उनके जिम्मे फूड, सिविल सप्लाई, कंज्यूमर अफेयर्स और पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन भी रहा और जन वितरण प्रणाली व्यवस्था को भी मजबूत बनाने में उनकी उल्लेखनीय भूमिका रही.

चतुरानन मिश्र ऐसे कम्युनिस्ट नेता नेता थे, जिन्होंने 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में भी लाग लिया और इस दौरान वे नेपाल की शरण लेकर सक्रिय आंदोलन में जुटे रहे. बाद में अंग्रेजों की पकड़ में आ गये और उन्हें दरभंगा जेल में बंद कर रखा गया.  इस दौरान वे प्रख्यात साम्यवादी नेता कॉमरेड भोगेंद्र झा के संपर्क में आये और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया के सक्रिय सदस्य बने और यहीं से वाम विचाराधारा के राह पर उनकी अनंत यात्रा की शुरुआत हुई. वामपंथी आंदोलन के क्रम में ही हजारीबाग-गिरिडीह जिले में महाजनी प्रथा और कोयला मजदूरों के शोषण के खिलाफ आवाज बुलंद किया.

जिसके कारण पहली बार उन्हें कम्युनिस्ट पार्टी की ओर से 1962 में बिहार विधानसभा चुनाव में गिरिडीह क्षेत्र से चुनाव लड़ने का अवसर मिला. पहला चुनाव लड़ रहे चतुरानन मिश्र विजयी नहीं हो पाये, लेकिन दूसरे स्थान पर रहने पर भी वे निराश नहीं हुए, बल्कि उनकी सक्रियता लगातार अपने क्षेत्र में बनी रही. जिसके बाद 1969 से 1980 तक वे गिरिडीह विधानसभा क्षेत्र से तीन बार विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए.

संगठन में मजबूत पकड़ की वजह से 1984 में भाकपा ने उन्हें राज्यसभा के लिए भेज दिया. वर्ष 1990 में वे राज्यसभा के लिए दोबारा चुने गये. 1996 में लोकसभा चुनाव में मधुबनी संसदीय सीट से निर्वाचित हुए और केंद्र में मंत्री बनकर राष्ट्रीय फसल बीमा योजना की शुरुआत की, जबकि विधायक रहते हुए उन्होंने वृद्धावस्था पेंशन का प्रस्ताव बिहार विधानसभा में रखा था.

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