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झारखंड में सुलझे नहीं सुलझ रहा जमीन विवाद, 52 करोड़ खर्च कर मंगाया गया था बिहार से नक्शा

by bnnbharat.com
December 10, 2020
in समाचार
झारखंड में सुलझे नहीं सुलझ रहा जमीन विवाद, 52 करोड़ खर्च कर मंगाया गया था बिहार से नक्शा
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👉 तीन ट्रकों में भर कर लाया गया था 82129 नक्शे, नक्शों का भी डिजीटाइजेशन नहीं हुआ

👉 25 करोड़ खर्च कर स्थापित किया जाना था प्रिंटिंग प्रेस

रांचीः झारखंड में जमीन विवाद सुलझने का नाम नहीं ले रहा. जमीन विवाद सुलझाने के लिए 52 करोड़ रुपये खर्च कर बिहार से 82129 नक्शे तीन ट्रकों में भरकर झारखंड मंगाये गये. पर ये नक्शे जस के तस पड़े हुए हैं. ये नक्शे बिहार के गुलजारबाग प्रेस से फॉटो कॉपी कर झारखंड लाये गये थे. इन नक्शों का डिजिटाइजेशन किया जाना था, पर ये नहीं हुआ. साथ ही नक्शों का फिर से फोटोकॉपी करने के लिए झारखंड में 25 करोड़ खर्च कर प्रिंटिंग प्रेस स्थापित किया जाना था, यह मामला भी ठंडे बस्ते में चला गया.

🔴 नहीं सुलझ रहा जमीन विवाद

झारखंड सरकार का नक्शा मंगाने का मुख्य उद्देश्य था कि राज्य के हर गांव की मैपिंग का सही अंदाजा लगाया जा सके. इससे बिहार-झारखंड की लंबित परिसंपत्तियों का बंटवारा सही तरीके से हो पाता. नक्शे की एक कॉपी रैयत के पास होती और दूसरी कॉपी प्रिंटिंग प्रेस में होती. लेकिन इस पर काम शुरू नहीं हो पाया. रैयती जमीन की मैपिंग नहीं होने के कारण भूमि विवाद बढ़ता जा रहा है. जमीन की मैपिंग नहीं होने से अवैध कब्जा के मामले बढ़ते ही जा रहे हैं. बिल्डरों को इससे फायदा पहुंच रहा है. इस पूरी प्रक्रिया में रैयतों को ही नुकसान हो रहा है. साथ ही रैयतों को मालिकाना हक नहीं नहीं मिलने के कारण लीगल मामलों की संख्या बढ़ती जा रही है.

🔴 नक्शों में कैथी भाषा का प्रयोग, समझनेवाले हैं गिनेचुने

नक्शा को समझने के लिए भाषा बड़ी बाधा बन गई है. नक्शा में कैथी भाषा का प्रयोग किया गया है. झारखंड में जो कैथी के जानकार थे, वे रिटायर कर गये. अब गिने-चुने लोग ही बचे हैं. 82129 नक्शों को समझना सरकार के लिए चुनौती बन गई है. खासकर संथाल परगना में कैथी भाषा के जानकार नहीं है. अगर नक्शों का शुद्धीकरण हो जाता तो 80 से 90 फीसदी विवादों का हल निकल जाता.

🔴 117 सीओ से स्पष्टीकरण भी

राजस्व निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग ने दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) और जमीन मापी के लंबित मामले को लेकर 117 अंचल अधिकारियों से स्पाष्टी्करण पूछा था लेकिन अभी तक अंचलाधिकारियों ने पूछे गये स्पंष्टीकरण का जवाब विभाग को नहीं सौंपा है. स्पष्टीकरण एक सप्ताह पहले ही पूछा था. ज्ञात हो कि विभाग ने अंचलाधिकारियों से पूछा था कि आखिर किस परिस्थिति में दाखिल-खारिज के मामले 30 दिनों से अधिक समय तक लंबित रखे गये है. तय समय सीमा के अंदर उसका निपटारा कर देना है या आपत्ति होने पर उसका जिक्र करना है, ताकि, रैयत अपने मामले को लेकर आगे संबंधित अधिकारी के पास जा सके. इसके बावजूद मामले लंबित रखे गये. संबंधित अपर समाहर्त्ता से पूछा गया है कि उनके द्वारा ऐसे लंबित मामलों में कार्रवाई क्यों नहीं की गयी. वहीं कई मामले ऐसे पाये गये कि जमीन मापी के लिए मिले आवेदन के बाद समय से जमीन की मापी भी नहीं हुई.

🔴 265 सर्किल में दाखिल-खारिज के 48192 मामले हैं लंबित

राज्य के सभी 265 सर्किल में दाखिल-खारिज के कुल 48192 मामले लंबित हैं. ऑनलाइन आवेदन भरने के बाद लोगों ने इसकी हार्ड कॉपी भी अंचल कार्यालय में जमा की है. अब उन्हें दौड़ना पड़ रहा है. रैयतों ने विभिन्न स्तरों पर शिकायत की थी कि आवेदन के साथ सारे दस्तावेज देने के बाद भी न तो दाखिल-खारिज किया जा रहा है और न ही आवेदन पर आपत्ति की जा रही है. विभाग ने ऑनलाइन आंकड़ा देखने और शिकायतों के आधार पर अंचलाधिकारियों से स्पस्टीकरण पूछा है.

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