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बिहार में जमीन सर्वे का कार्य हुआ शुरू

by bnnbharat.com
September 8, 2020
in समाचार
बिहार में जमीन सर्वे का कार्य हुआ शुरू
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सर्वे से जमीन मालिकों को होगा फायदा

जमीन के अवैध खरीद बिक्री पर लगेगी रोक

मुंगेर: बिहार के ज्यादातर जिलों में जमीन के सर्वे का कार्य शुरू हो गया है. इसमें अब जीवित रैयत जमीन यानी कि इस जमीन के वर्तमान मालिक के नाम से खतियान बनेगा. इसके लिए बिहार सरकार ने सर्वे कराना शुरू कर दिया है.आपको बता दें कि इससे पहले 1950 में सर्वे का कार्य किया गया था. नए खतियान बन जाने के बाद से लोगों को जमीन विवाद से छूटकारा मिल जाएगा. इधर बिहार सरकार ने जमीन के सर्वे के कार्यों के लिए अफसरों के टीमों का गठन कर दिया है. बताया गया है कि इसके लिए छः टीमों का गठन किया गया है. ये टीमें मुख्यालय से रवाना हो गई हैं.इधर सभी जिलों में अमीन, सहायक बंदोबस्त पदादिकारियों, कानूनगो, लिपिकों को इस कार्य के लिए पदास्थापित कर दिया गया है. इसके साथ ही पूरे सर्वे के लिए नोडल अधिकारी की भी नियुक्ति की गई है जो सर्वे का निरीक्षण करेंगे.

प्रदेश के इन जिलों में वर्तमान में सर्वे का कार्य जारी है- नालंदा, जहानाबाद, मुंगेर, लखीसराय, सुपौल, अररिया, अरवल, कटिहार, किशनगंज, खगड़िया, जमुई, शिवहर, सहरसा, सीतामढ़ी, चंपारण, पूर्णिया, बांका, शेखपुरा, बेगूसराय और मधेपुरा है जिसमे से शिवहर के तीन अंचल डुमरी, कटसरी, पिपराही, पूरनहिया में भूमि सर्वेक्षण का कार्य शुरू कर दिया गया है. आपको बता दें कि इस कार्य के लिए इन जिलों में प्रखंड स्तर पर शिविर भी लगाया गया था. वर्तमान में भूमि को लेकर जो कार्य किए जा रहे हैं वह बिहार विशेष, सर्वेक्षण बंदोबस्त नियमावली 2012 के तहत सर्वे किया जा रहा है.

सर्वे का महत्व

इस सर्वे से जमीन का नया खतियान बनेगा. साथ ही जमीन का नया मानचित्र भी आएगा. इस मानचित्र को डिजिटल प्रारूप में रखा जाएगा और हर खरीद बिक्री के बाद खतियान निरंतर अपडेट होता रहेगा. हर खतियान की चार कॉपी बनेगी, जिसमें एक कॉपी रैयत को दूसरा अंचलाधिकारी को तीसरा जिलाधिकारी और चौथा भू अभिलेख विभाग निदेशालय के पास सुरक्षित रहेगा. सर्वे के बाद जमीन के खतियान की हार्ड कॉपी और डिजिटल कॉपी भी तैयार होगी. दरअसल, राज्य में कैडेस्ट्रेल सर्वे के बाद कुछ जिलों में ही रिविजनल सर्वे हो पाया था. इसलिए अधिकतर जिलों में सर्वे का काम लंबे समय से रुका पड़ा है. इस सर्वे का महत्व यह है कि इससे जमीन की अवैध खरीद बिक्री पर रोक लग जाएगी. फर्जीवाड़ा नहीं हो पाएगा और जमीन के वास्तविक मालिकों का तुरंत पता चल पाएगा.

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