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जानें कैसे हुआ था 19 साल पहले ‘संसद भवन’ पर आतंकी हमला…

by bnnbharat.com
December 13, 2020
in समाचार
जानें कैसे हुआ था 19 साल पहले ‘संसद भवन’ पर आतंकी हमला…
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BNN DESK: ठंड का मौसम था और बाहर धूप खिली हुई थी. संसद में विंटर सेशन चल रहा था और “महिला आरक्षण बिल” पर हंगामा जारी था. इस दिन भी इस बिल पर चर्चा होनी थी, लेकिन 11:02 बजे संसद को स्थगित कर दिया गया. इसके बाद उस समय के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और विपक्ष की नेता सोनिया गांधी संसद से जा चुके थे. तब के उपराष्ट्रपति कृष्णकांत का काफिला भी निकलने ही वाला था. संसद स्थगित होने के बाद गेट नंबर 12 पर सफेद गाड़ियों का तांता लग गया.

इस वक्त तक सबकुछ अच्छा था, लेकिन चंद मिनटों में संसद पर जो हुआ, उसके बारे में न कभी किसी ने सोचा था और न ही कल्पना की थी. करीब साढ़े ग्यारह बजे उपराष्ट्रपति के सिक्योरिटी गार्ड उनके बाहर आने का इंतजार कर रहे थे और तभी सफेद एंबेसडर में सवार 5 आतंकी गेट नंबर-12 से संसद के अंदर घुस गए. उस समय सिक्योरिटी गार्ड निहत्थे हुआ करते थे.

ये सब देखकर सिक्योरिटी गार्ड ने उस एंबेसडर कार के पीछे दौड़ लगा दी. तभी आनन-फानन में आतंकियों की कार उपराष्ट्रपति की कार से टकरा गई. बस फिर क्या था, घबराकर आतंकियों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी. ऐसा लगा, मानो जैसे कोई पटाखे फोड़ रहा हो. आतंकियों के पास एके-47 और हैंडग्रेनेड थे, जबकि सिक्योरिटी गार्ड निहत्थे थे.

संसद भवन में अक्सर CRPF की एक बटालियन मौजूद रहती है. गोलियों की आवाज सुनकर ये बटालियन अलर्ट हो गई. CRPF के जवान दौड़-भागकर आए. उस वक्त सदन में देश के गृह मंत्री लालकृष्ण आडवाणी, प्रमोद महाजन समेत कई बड़े नेता और पत्रकार मौजूद थे. सभी को संसद के अंदर ही सुरक्षित रहने को कहा गया. इस बीच एक आतंकी ने गेट नंबर-1 से सदन में घुसने की कोशिश की, लेकिन सिक्योरिटी फोर्सेस ने उसे वहीं मार गिराया. इसके बाद उसके शरीर पर लगे बम में भी ब्लास्ट हो गया.

बाकी के 4 आतंकियों ने गेट नंबर-4 से सदन में घुसने की कोशिश की, लेकिन इनमें से 3 आतंकियों को वहीं पर मार दिया गया. इसके बाद बचे हुए आखिरी आतंकी ने गेट नंबर-5 की तरफ दौड़ लगाई, लेकिन वो भी जवानों की गोली का शिकार हो गया. जवानों और आतंकियों के बीच 11:30 बजे शुरू हुई ये मुठभेड़ शाम को 4 बजे खत्म हुई.

पांचों आतंकी तो मर गए, लेकिन संसद हमले की साजिश रचने वाले बच गए थे. संसद हमले के दो दिन बाद ही 15 दिसंबर 2001 को अफजल गुरु, एसएआर गिलानी, अफशान गुरु और शौकत हुसैन को गिरफ्तार कर लिया गया. बाद में सुप्रीम कोर्ट ने गिलानी और अफशान को बरी कर दिया, लेकिन अफजल गुरु की मौत की सजा को बरकरार रखा. शौकत हुसैन की मौत की सजा को भी घटा दिया और 10 साल की सजा का फैसला सुनाया. 9 फरवरी 2013 को अफजल गुरू को दिल्ली की तिहाड़ जेल में सुबह 8 बजे फांसी पर लटका दिया गया.

जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी गाजी बाबा को BSF ने 10 घंटे चले एनकाउंटर के बाद मार गिराया. गाजी बाबा संसद हमले का मुख्य आरोपी था. इस पूरे हमले में दिल्ली पुलिस के 5 जवान, CRPF की एक महिला सिक्योरिटी गार्ड शहीद हो गए थे . वहीं, राज्यसभा के 2 कर्मचारी और एक माली की मौत हो गई थी.

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