BnnBharat | bnnbharat.com |
  • समाचार
  • झारखंड
  • बिहार
  • राष्ट्रीय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • औषधि
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स
  • स्वास्थ्य
No Result
View All Result
  • समाचार
  • झारखंड
  • बिहार
  • राष्ट्रीय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • औषधि
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स
  • स्वास्थ्य
No Result
View All Result
BnnBharat | bnnbharat.com |
No Result
View All Result
  • समाचार
  • झारखंड
  • बिहार
  • राष्ट्रीय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • औषधि
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स
  • स्वास्थ्य

जानें क्या है गुरु पूर्णिमा का महत्व, कैसे की जाती है इसकी उपासना

by bnnbharat.com
July 16, 2019
in Uncategorized
जानें क्या है गुरु पूर्णिमा का महत्व, कैसे की जाती है इसकी उपासना
Share on FacebookShare on Twitter

आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के पर्व के रूप में मनाया जाता है. इस दिन महर्षि वेदव्यास का जन्म भी हुआ था, अतः इसे व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं. इस दिन से ऋतु परिवर्तन भी होता है अतः इस दिन वायु की परीक्षा करके आने वाली फसलों का अनुमान भी किया जाता है. इस दिन शिष्य अपने गुरु की विशेष पूजा करता है और उसे यथाशक्ति दक्षिणा,पुष्प,वस्त्र आदि भेंट करता है.शिष्य इस दिन अपनी सारे अवगुणों को गुरु को अर्पित कर देता है, तथा अपना सारा भार गुरु को दे देता है. इस बार गुरु पूर्णिमा का पर्व 16 जुलाई को मनाया जाएगा.

कौन हो सकता है आपका गुरु-

सामान्यतः हम लोग शिक्षा प्रदान करने वाले को ही गुरु समझते हैं परन्तु वास्तव में ज्ञान देने वाला शिक्षक बहुत आंशिक अर्थों में गुरु होता है. जन्म जन्मान्तर के संस्कारों से मुक्त कराके जो व्यक्ति या सत्ता ईश्वर तक पहुंचा सकती हो,ऐसी सत्ता ही गुरु हो सकती है. हिंदू धर्म में गुरु होने की तमाम शर्तें बताई गई हैं, जिसमें से प्रमुख 13 शर्तें निम्न प्रकार से हैं.

Also Read This:- Vivo Z1 Pro की सेल 12 बजे से होगी शरु, पंच होल डिस्प्ले वाला सबसे सस्ता SmartPhone

-शांत/दान्त/कुलीन/विनीत/शुद्धवेषवाह/शुद्धाचारी/सुप्रतिष्ठित/शुचिर्दक्ष/सुबुद्धि/आश्रमी/ध्याननिष्ठ/तंत्र-मंत्र विशारद/निग्रह-अनुग्रह.

– गुरु की प्राप्ति हो जाने के बाद प्रयास करना चाहिए कि उसके दिशा निर्देशों का यथा शक्ति पालन किया जाए.

कैसे करें गुरु की उपासना-

– गुरु को उच्च आसन पर बैठाएं.

– उनके चरण जल से धुलाएं और पोंछे.

– फिर उनके चरणों में पीले या सफेद पुष्प अर्पित करें .

– इसके बाद उन्हें श्वेत या पीले वस्त्र दें.

– यथाशक्ति फल,मिष्ठान्न दक्षिणा अर्पित करें.

– गुरु से अपना दायित्व स्वीकार करने की प्रार्थना करें.

अगर आपके गुरु नहीं हैं तो क्या करें?

– हर गुरु के पीछे गुरु सत्ता के रूप में शिव जी ही हैं.

– अतः अगर गुरु न हों तो शिव जी को ही गुरु मानकर गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाना चाहिए.

– श्रीकृष्ण को भी गुरु मान सकते हैं.

– श्रीकृष्ण या शिव जी का ध्यान कमल के पुष्प पर बैठे हुए करें.

– मानसिक रूप से उनको पुष्प,मिष्ठान्न, तथा दक्षिणा अर्पित करें.

– स्वयं को शिष्य के रूप में स्वीकार करने की प्रार्थना करें.

Share this:

  • Click to share on Facebook (Opens in new window)
  • Click to share on X (Opens in new window)

Like this:

Like Loading...

Related

Previous Post

‘संस्कृत ने भारत को किया एक….. इसे बढ़ावा दें’

Next Post

पहली बरसात भी नहीं झेल पाई पक्की सड़क

Next Post

पहली बरसात भी नहीं झेल पाई पक्की सड़क

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

  • Privacy Policy
  • Admin
  • Advertise with Us
  • Contact Us

© 2025 BNNBHARAT

No Result
View All Result
  • समाचार
  • झारखंड
  • बिहार
  • राष्ट्रीय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • औषधि
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स
  • स्वास्थ्य

© 2025 BNNBHARAT

%d