बिहार: 15 अगस्त 1947 की मध्य रात्रि से ठीक पहले संविधान सभा को संबोधित करते हुए पंडित जवाहरलाल नेहरू ने एक ऐतिहासिक भाषण दिया था “ट्रस्ट विथ डेस्टिनी” के नाम से मशहूर इस भाषण में उन्होंने सभासदों को याद दिलाया कि वर्षों पहले उन लोगों ने भाग्य से एक वादा किया था और जब भारत आजाद होने को है, तो वह वायदा पूरा होता दिख रहा है.
संभवतः पंडित नेहरू अपने अध्यक्षीय भाषण की ओर इंगित कर रहे थे, जिसे उन्होंने रावी नदी के तट पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के लाहौर सत्र (1929) में दिया था. इसी संभाषण में पंडित जी ने पूर्ण स्वतंत्रता की मांग रखी थी और स्वतंत्र होने वाले भारतीय राष्ट्र राज्य के स्वरूप को भी चिन्हित किया था.
नेहरूवादी “ट्रस्ट विथ डेस्टिनी”की ओर लौटते हुए हमे खुद को यह ज्ञात कराना होगा कि “भारत की वैचारिकी” क्या है ? भारत, जैसा कि स्वतंत्रता संग्राम के शहीदों और आधुनिक भारत के निर्माताओं ने कल्पना की थी, एक लोकतांत्रिक गणराज्य, जो समाजवाद और धर्मनिरपेक्षता के आदर्शों पर खरा उतरते हुए जनता के सुखों के लिए समर्पित रहे.
भारत, जो घोर अंतर्विरोधो के साए में, जैसे, धर्म, जाति, क्षेत्रवाद, भाषाई आधारों पर बना हुआ है और इस “अनेकता में अपनी एकता” पर गर्व करता आया है. आज इसकी इस अस्मिता पर खतरा है. फासिस्ट ताकतें अपनी संप्रदायिक शक्ति का प्रयोग करके भारत की बहुल अस्मिता को सिर्फ एक संस्कार और धर्म के अधीन करना चाहते हैं.
भारत के 130 करोड़ जनता में विभेद कर गरीबों को रोटी–रोटी के लिए मोहताज करना चाहते हैं. इस प्रतिक्रियावादी योजना को हम सबको मिलकर हराना होगा.
आज केवल बस एक ऐसा जन नेता है जो महात्मा गांधी के आदर्शवाद और पंडित नेहरू के यथार्थवाद का सही मिश्रण है, और वह है राहुल गांधी जिनके नेतृत्व में हमें इस अंधकार से मुक्ति मिलेगी. ट्रस्ट विद डेस्टिनी भाषण के मध्य में पंडित नेहरू ने कुछ ऐसा कहा जो इतिहास में परिवर्तन का नयामक रहा है.
उन्होंने कहा था,” एक ऐसा पल आता है, जो इतिहास में बहुत कम देखने को मिलता है, जहां हम पुराने से नए में प्रवेश करते हैं, इस पल में एक युग समाप्त होता है और एक राष्ट्र की आत्मा जो बरसों से बंधक हो, मुक्ति और शांति का पर्व मनाती है.”
समकालीन भारत में भी वह पल तब आएगा, जब राहुल गांधी जी के नेतृत्व में देश आगे बढ़ेगा. वे एक ऐसी विचारधारा का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिसके साथ देश का विकास हुआ है.
एक ऐसी विचारधारा, जहां सबसे गरीब और राष्ट्र के बड़े नेताओं को एक ही तन्मयता से सुना जाता है. वे एक सच्चे सेक्यूलर जन नेता है, जो सभी धर्मों का आदर करते हुए समाज में व्याप्त बुराइयों को उखाड़ फेंकने में सक्षम है.
हमें पूर्ण विश्वास है कि कांग्रेस पार्टी एक बार फिर से राहुल जी के नेतृत्व में सत्ता में वापसी करेगी. आज भारत और उसकी जनता को अपने हितों के लिए कदाचित कांग्रेस पार्टी की सबसे अधिक आवश्यकता है.
हमें विश्वास है कि बहुत जल्द राहुल गांधी अपने भाग्य को प्राप्त कर भारत और उसकी 130 करोड़ जनता के नेता बन जाएंगे. जन्मदिन पर बहुत-बहुत बधाई एवं अनेकानेक शुभकामनाएं.

