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सांसद महेश पोद्दार ने सी पी सिंह को लिखा पत्र, कहा बकरी बाजार में मार्केट प्लेस और पार्किंग स्थल बनाने का निर्णय डराने वाला

by bnnbharat.com
July 17, 2019
in समाचार

Became a member of the committee related to the Public Undertakings of Parliament, Mahesh Poddar

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रांची: संसद महेश पोद्दार ने नगर विकास मंत्री सी पी सिंह को एक खुला पत्र लिखा है।

उन्होंने पत्र में लिखा कि:-

कल सुबह अखबारों की सुर्ख़ियों ने मुझे डरा दिया और उसी डर के वशीभूत आपको यह खुला पत्र लिखने को विवश हुआ हूं। ज्ञात हुआ कि रांची नगर निगम अपर बाज़ार स्थित बकरी बाज़ार में मार्केट और पार्किंग प्लेस बनाने का निर्णय ले रहा है। विभिन्न सरकारी भवनों और अन्य संरचनाओं के कारण पहले ही कंक्रीट के जंगल में बदल चुके रांची शहर के लिए यह नयी खबर डराने वाली ही है।
आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी सदैव खुली जगहों को बचाने की बात करते हैं, बच्चों को खेलने की जगह देने की बात करते हैं। झारखण्ड में भी गांवों में स्टेडियम बन रहे हैं, फिर शहर के बच्चों का अपराध क्या है?आपको बताने की आवश्यकता नहीं कि रांची का अपर बाज़ार मिश्रित प्रकृति का एक घनी आबादी वाला इलाका है और इस इलाके में बकरी बाज़ार ही एकमात्र खुली जगह है। आसपास के करीब 5 किलोमीटर के दायरे में कोई दूसरा खेल मैदान या खुली जगह नहीं है।
यह भी आपके स्मरण में होगा कि बकरी बाज़ार को खुले मैदान के रूप में विकसित करने के आग्रह के साथ मैं आपको एवं नगर विकास विभाग के अधिकारियों को कई पत्र लिख चुका हूं। इन पत्रों में अन्य बातों के साथ इस बात का भी जिक्र है कि अग्रवाल सभा ने बकरी बाज़ार को खुले मैदान के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव दिया है और मैं स्वयं भी अपनी सांसद निधि से इस कार्य के लिए वित्त पोषण को प्रस्तुत हूं। ये अलग बात है कि न तो इन पत्रों के आधार पर कोई सकारात्मक कार्रवाई हुई, न मुझे इस मामले में लिए गए किसी निर्णय से अवगत कराया गया।
अखबारों की खबरों के मुताबिक़ श्री राजीव चड्ढा का नाम लेकर ये जताने की कोशिश हो रही है कि ये उनकी स्कीम है। महोदय, श्री चड्ढा तो एक आर्किटेक्ट हैं, उन्हें जो जिम्मेवारी नगर विकास विभाग या नगर निगम देगा वो करेंगे। जाहिर है, इस निर्णय की जिम्मेवारी भी नगर विकास विभाग या नगर निगम को लेनी चाहिए।
महोदय, हमारे प्रिय प्रधानमंत्री हमेशा सरकारी योजनाओं में जन भागीदारी और पारदर्शिता के पक्षधर हैं।इस शहर में नालों या सीवरेज ड्रेनेज के नाम पर जो कारोबार चल रहा है, वह आपसे छुपा हुआ नहीं है। 200 करोड़ का स्मार्ट नाला बनवाया जा रहा है लेकिन उसका औचित्य क्या है, सार्वजनिक रूप से नगर विकास विभाग का कोई अधिकारी बोलता ही नहीं है। हरमू नदी के सौन्दर्यीकरण के नाम पर जनता के धन के अपव्यय पर आम लोगों, जन प्रतिनिधियों के साथ न्यायपालिका से जुड़े लोग तक प्रतिकूल टिप्पणी कर चुके हैं, लेकिन कोई इसकी जिम्मेवारी लेने को तैयार नहीं।आपके पास भी इन योजनाओं से जुड़ी कई शिकायतें आ रही हैं। अब यदि इन शिकायतों और मेरी बातों को भी लगातार नजरअंदाज किया जाएगा तो संभव है कि भविष्य में बहुत सारी ऐसी बातें होंगी जो शायद अप्रिय होंगी।
बकरी बाज़ार में मार्केट और पार्किंग बनाने की सोच किसकी है, ये मुझे नहीं मालूम, लेकिन इस निर्णय पर मेरा घोर विरोध है।
आप कह सकते हैं कि यह नगर निगम का फैसला है और आपके मंत्रालय का इस फैसले में कोई दखल नहीं है। लेकिन, नगर निगम से जुड़े लोगों से जब भी मैंने बात की है, उनका कहना होता है कि सबकुछ नगर विकास विभाग तय करके हमें सौंपता है। उनके हिसाब से अटल वेंडर मार्केट भी नगर विकास विभाग ने ही बनवाया है।
आप ये भी कह सकते हैं कि बकरी बाज़ार मामले में शुरुआत उप महापौर श्री संजीव विजयवर्गीय जी ने की है। यदि यह सत्य है और आपकी कोई भूमिका नहीं, तो भी राज्य के नगर विकास मंत्री के रूप में उन्हें रोकने की जिम्मेवारी तो आप पर आती है। और कुछ नहीं तो कम से कम इस मामले में आपकी राय तो सार्वजनिक होनी ही चाहिए। लोगों को पता होना चाहिये कि इस मामले में आप क्या सोचते हैं।
खैर, ये मामला आपके और नगर निगम के बीच का है, लेकिन यदि रांची शहर की इसी तरह दुर्गति होती रही तो आज नहीं तो कल इसका विरोध होगा और इसकी जिम्मेवारी से आप नहीं बच पायेंगे। मैं उस संभावित अप्रिय स्थिति को टालना चाहता हूं।
मैं समझ नहीं पाता कि यदि नगर विकास विभाग या नगर निगम हरमू में पार्क बना सकता है तो बकरी बाज़ार में पार्क या खुला मैदान बनाने से कौन रोकता है। हरमू के लोग तो 40 – 50 साल से हैं,उन्हें सरकारी आवासीय योजना के तहत बसाया गया है जबकि अपर बाज़ार में लोग सैकड़ों सालों से रह रहे हैं, लोगों की पुश्तैनी संपत्ति है यहां।
राज्य के मुख्य सचिव ने भी बाउंड्रीवाल के लिए कुछ मानक तय किये हैं। उन्होंने निर्देश दिया है कि तालाबों को, खुले मैदानों को या अन्य संरचनाओं को किस प्रकार घेरना है। मुख्य सचिव के निर्देश के बारे में जो कुछ मुझे पता है उसके मुताबिक़ दुकानें बनाकर बकरी बाज़ार को घेरने की योजना कहीं से भी उचित नहीं जान पड़ती। मैं समझ नहीं पा रहा कि यह विलक्षण आईडिया किनके दिमाग में कहां से आया।
महोदय, माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी जल संरक्षण के लिए चिंतित हैं। राज्य सरकार जल संरक्षण के लिए अभियान चला रही है। आप अवगत हैं कि बकरी बाज़ार में अपर बाज़ार का अधिकांश पानी बहकर आता है। यदि वहां कंक्रीट स्ट्रक्चर बनेगा तो पानी का प्रवाह रुक जाएगा। खुली जमीन सतही जल को अवशोषित करती है, यह प्रक्रिया भी रुक जायेगी। अपर बाज़ार की ऐसी एकमात्र जगह पर जहां जमीन पानी सोखती है, अगर कंक्रीट का स्ट्रक्चर खड़ा हो जाएगा तो यह शहर में भूमिगत जल के लिए एक नया संकट होगा। यह माननीय प्रधानमंत्री के संकल्प पर प्रहार की तरह होगा। क्या यह बेहतर नहीं होगा कि अपर बाजार क्षेत्र का पूरा पानी जमा करके बकरी बाज़ार में जल संरक्षण के लिए तालाब बना दिया जाय।
महोदय, राज्य के नगर विकास मंत्री के तौर पर आप इस तथ्य से अवगत होंगे कि हर शहर में आबादी के घनत्व और खुली जगह का एक निश्चित और न्यूनतम अनुपात होता है और प्रत्येक स्थिति में इस न्यूनतम अनुपात को कायम रखने की कोशिश की जाती है। रांची में अधिकांश खुली जगहों पर भवन बन गए हैं, खाली जगह है ही नहीं। अबतक जो अनुपात बिगड़ चुका, उसे नजरअंदाज भी करें तो अब बची हुई खुली जगहों को बचाना तो हम सबका दायित्व है, आपका दायित्व इस मामले में कुछ ज्यादा ही है।
रही बात पार्किंग स्पेस की, तो अंडरग्राउंड बनाईये, ओवरग्राउंड बनाईये वो एक अलग मुद्दा है। लेकिन बकरी बाज़ार में जितनी दुकानें बनवाने की योजना है,आनेवाले समय में सारे दुकानदार गाड़ी वाले होंगे और वही लोग पार्किंग की जगह भर देंगे। ऊपर में जो ऑफिस कॉम्प्लेक्स बनेगा, उसके कर्मचारी बाकी बची खुची जगह भर देंगे। ऐसी स्थिति में ट्रक तो वहां पार्क हो नहीं पायेंगे। बकरी बाज़ार की मदद अगर पार्किंग समस्या हल करने के लिए ही लेनी है तो बेहतर है कि इसका खुले मैदान के रूप में विकास कर सड़क के किनारे 20 फीट जगह छोड़ दीजिये, जिसपर लोग अपनी गाड़ी और मोटरसाइकिल खड़ी कर लें, उसके बाद लोहे का ग्रिल लगा दीजिये।
महोदय, मेरे हिसाब से नगर विकास विभाग और नगर निगम की प्राथमिकताएं कुछ और होनी चाहिए। मार्केटिंग कॉम्प्लेक्स बनाना निजी क्षेत्र का काम है और यह काम पूरी रफ़्तार से हो भी रहा है। नगर विकास विभाग या नगर निगम को इस प्रकल्प से बचना चाहिए। शहर बेतरतीब तरीके से फ़ैल रहा है, खेतों में कॉलोनियां बन रही हैं। इन अव्यवस्थित कॉलोनियों में सीवरेज, ड्रेनेज, सड़क, पेयजल आदि कोई भी नागरिक सुविधा व्यवस्थित और नियमित नहीं है। पांच – दस साल बाद यही कॉलोनियां सिरदर्द बनेंगी। लोग नागरिक सुविधाएं मांगेंगे और उन्हें पहुंचाने में वही परेशानी आयेगी जो आज सीवरेज सिस्टम या यातायात व्यवस्था को ठीक करने में आ रही है। नगर विकास विभाग और नगर निगम की प्राथमिकता नयी बसावट वाले इलाकों की प्लानिंग और पुरानी बसावट वाले इलाकों तक नागरिक सुविधाएं पहुंचाने की कोशिश होनी चाहिए।
यदि नगर विकास विभाग वाकई जनता की चिंता करना चाहे तो चिंता इस बात की होनी चाहिए कि अबतक पूरे शहर को शुद्ध पेयजल मुहैया कराना क्यों नहीं संभव हो पाया है। यह भी कि शहर की बढ़ती आबादी के मुताबिक़ क्या हमारे पास पर्याप्त जलागार हैं और जो जलागार हैं उनमें क्या शहर के नागरिकों की जरुरत के मुताबिक़ जल भण्डार है। उत्साह प्रदर्शित करने के लिए सबसे उपयुक्त मामला यह है कि रांची शहर के लिए नए जल भण्डार तलाशकर उन्हें जलापूर्ति के लिए तैयार किया जाय, पुराने जल स्रोतों की क्षमता बढ़ाई जाय।
मैं मानता हूं कि बकरी बाज़ार के मामले में जनता को जन आकांक्षाओं के अनुरूप सही योजना के प्रस्ताव से अवगत कराने और उसपर अमल कराने के लिए आप सबसे उपयुक्त पात्र हैं। मैं और शायद इस शहर की अधिकांश जनता इस मामले पर आपकी बेबाक राय की प्रतीक्षा करेगी। मैं प्रस्तावित योजना के विरोध में हूं और आपसे अपेक्षा है कि जनभावना के अनुरूप आप इस मामले में त्वरित कार्रवाई करेंगे।

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