चतरा: चतरा की लाइफ लाइन यानी झारखंड-बिहार को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण एनएच 99 पर जान जोखिम में डालकर यात्रा करने को विवश लोगों को जल्द ही पक्की और चमचमाती सड़क की सौगात मिलने वाली है.
दरअसल, एक लंबे अरसे से बड़े-बड़े गड्ढों और डस्ट के आगोश में समा चुके झारखंड को बिहार से जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग 99 के दिन बहुरने वाले हैं. यूं कहें तो जर्जर सड़क के कारण दुर्घटनाओं के शिकार होने वाले लोग अब न सिर्फ दुर्घटनाओं से बच सकेंगे, बल्कि अकाल मौत के गाल में समाने के भय से भी उन्हें निजात मिलेगी.
झारखंड सरकार के श्रम नियोजन व श्रम मंत्री सत्यानंद भोक्ता के हस्तक्षेप के बाद कई वर्षों से ठंडे बस्ते में पड़े हाईवे जीर्णोद्धार का काम अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है.
मंत्री द्वारा निर्माण एजेंसी और उससे जुड़े विभागों के अधिकारियों को फटकार लगाए जाने के बाद सड़क जीर्णोद्धार कार्य को एनओसी मिलने का रास्ता साफ हो गया और मंत्री के निर्देश के बाद निर्माण एजेंसी के अलावे वन विभाग व एनएच के अधिकारियों ने ग्रामीणों के साथ बैठक कर जीर्णोद्धार कार्य में आ रही बाधाओं को दूर कर लिया है. साथ ही सड़क पर बन गए.
दूसरी ओर इस सकारात्मक पहल से सड़क के बड़े-बड़े गड्ढों को भी भरने की कवायद शुरू कर दी गई है. मौके पर जनप्रतिनिधियों ने कहा है कि एक सप्ताह के भीतर वर्षों से लंबित एनओसी कार्य पूर्ण करते हुए हाईवे जीर्णोद्धार कार्य को पूरे दमखम और गति के साथ शुरू कर दिया जाएगा. इतना ही नहीं कार्य एजेंसी ने 15 दिनों में चतरा-जोरी के जर्जर हाईवे को बनाने का आश्वासन भी दिया है.
गौरतलब है कि चतरा होकर गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग 99 झारखंड-बिहार के आवाजाही के लिए एक तटस्थ व प्रमुख माध्यम है. यह सड़क चतरा शहर से जोरी के बीच पूरी तरह से न सिर्फ गड्ढों में तब्दील हो चुकी थी बल्कि अपनी जर्जर हालत के कारण अस्तित्व भी खोते जा रही थी. जिसे गंभीरता से लेते हुए श्रम मंत्री ने वन विभाग के अलावे एनएच और निर्माण एजेंसी के अधिकारियों के साथ बैठक कर समन्वय स्थापित करते हुए यथाशीघ्र जर्जर एनएच का जीर्णोद्धार कार्य शुरू करने का निर्देश दिया था.
हाईवे का जीर्णोधार कार्य वर्षों से वन विभाग द्वारा एनओसी नहीं दिए जाने के कारण पेंडिंग था. जिसके कारण करीब 20 किलोमीटर की यात्रा न सिर्फ लोगों को जान हथेली पर डालकर करनी पड़ रही थी, बल्कि आए दिन हो रहे सड़क दुर्घटनाओं में यात्रियों को जान भी गंवानी पड़ती थी. ऐसे में हाईवे जीर्णोद्धार का मार्ग प्रशस्त होने से यात्रियों व राहगीरों ने राहत की सांस ली है.

