BnnBharat | bnnbharat.com |
  • समाचार
  • झारखंड
  • बिहार
  • राष्ट्रीय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • औषधि
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स
  • स्वास्थ्य
No Result
View All Result
  • समाचार
  • झारखंड
  • बिहार
  • राष्ट्रीय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • औषधि
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स
  • स्वास्थ्य
No Result
View All Result
BnnBharat | bnnbharat.com |
No Result
View All Result
  • समाचार
  • झारखंड
  • बिहार
  • राष्ट्रीय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • औषधि
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स
  • स्वास्थ्य

कट जाएगी जिंदगी, पर पढ़ नहीं पाएगी सोनी

by bnnbharat.com
November 28, 2020
in समाचार
कट जाएगी जिंदगी, पर पढ़ नहीं पाएगी सोनी
Share on FacebookShare on Twitter

नि‍रज कुमार,

रांची: झारखंड की राजधानी रांची में लगभग हर प्रमुख चौक चौराहों पर आपको कूड़ा उठाते कुछ लोग दिख जाएंगे. इनमें से कुछ हालात के मारे होते हैं. कुछ इसी को पेशा मान बनाकर जिंदगी भर यही काम करते हैं. हालांकि उन पर किसी का ध्याोन नहीं जाता है. कुछ इसी तरह का जीवन जी रही है रांची के कडरू इलाके की रहने वाली दो बहनें सोनी और रानी परवीन, जो सालों से यही काम कर अपना गुजर-बसर कर रही हैं.

ये दोनों बहनें कचरा बेचकर अपना घर चलाती है. रानी परवीन का कहना है कि उन्हें कचरा उठाने और उससे बेचकर इनकम करने में किसी तरह की खराबी नहीं लगती है. यह भी एक काम है. कैसी शर्म इसी से हमारा घर चलता है.

रानी परवीन 10 साल की उम्र से ही इस काम को कर रही है. अभी रानी की उम्र 26 साल है. वह टूटी-फूटी अंग्रेजी भी बोल लेती है. उसके तीन बच्चे हैं. तीनों बच्चे पढ़ाई नहीं करते. पति भी साथ नहीं रहता. साल में एक बार घर आता है. दिल्ली में रहकर ही अपना गुजारा करता है. सप्ताह में एक या दो बार फोन कर हालचाल पूछ लेता है.

छोटी बहन सोनी परवीन (बदला हुआ नाम) भी उसके साथ में ही रहती है. मां बाप नहीं होने का कारण रानी, सोनी को अपने घर पर ही रखती है. 15 वर्ष की सोनी भी इसी काम में बहन का हाथ बटाती है. घर में कोई परिजन नहीं होने के कारण सोनी भी बहन के साथ सड़क पर घूम-घूमकर कूड़ा उठती है.

सोनी पढ़ना चाहती है, पर हालात के कारण सोनी पढ़ाई नहीं कर पा रही. दोनों बहन मिलकर महीने भर का 9 से 10 हजार कमा लेती हैं. जिसमें से आधा से अधिक पैसा रेंट और खाने में चला जाता है. बचे पैसे इधर-उधर के कामों में चला जाता है. इनके पास कोई सरकारी सुविधा नहीं है. न राशन कार्ड न ही आयुष्मान कार्ड बना हुआ है, जिससे कि वे सरकारी सुविधाओं का लाभ ले सकें.

वैसे तो शिक्षा सबका मौलिक अधिकार है. सरकार की ओर से भी ‘बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ’ योजना चलाई जा रही है, लेकिन अभी भी बहुत से जरूरतमंदों तक यह योजना नहीं पहुंच पाई है. इसका जीता जागता उदाहरण यह दो बहनें है. दिन भर इसी काम में रहने के कारण सोनी पढ़ाई नहीं कर पाती है. वो पढ़ना चाहती है, पर स्थिति अनुकूल नहीं है.

गवाह हैं आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के हिसाब से राज्य में 58.7 प्रतिशत बच्चे अनपढ़ है. जिनमें 45.2% बालक वर्ग 68.3% बालिका वर्ग शामिल है. यह आंकड़ा 14 से 18 आयु वर्ग के बच्चों का है.

Share this:

  • Click to share on Facebook (Opens in new window)
  • Click to share on X (Opens in new window)

Like this:

Like Loading...

Related

Previous Post

PLFI सुप्रीमो दिनेश गोप को पकड़ने लिए चलाया गया सर्च अभियान

Next Post

कोयला तस्करी: CBI ने तीन राज्यों में 40 स्थानों पर मारे छापे, तलाशी अभियान जारी

Next Post
कोयला तस्करी: CBI ने तीन राज्यों में 40 स्थानों पर मारे छापे, तलाशी अभियान जारी

कोयला तस्करी: CBI ने तीन राज्यों में 40 स्थानों पर मारे छापे, तलाशी अभियान जारी

  • Privacy Policy
  • Admin
  • Advertise with Us
  • Contact Us

© 2025 BNNBHARAT

No Result
View All Result
  • समाचार
  • झारखंड
  • बिहार
  • राष्ट्रीय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • औषधि
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स
  • स्वास्थ्य

© 2025 BNNBHARAT

%d