आजादी के महानायक बिरसा मुंडा ने जिस जेल में ली थी अंतिम सांस, अब बनेगा राष्ट्रीय धरोहर
रांची: अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की राजधानी पोर्ट ब्लेयर में बनी सेल्यूलर जेल की तरह ही रांची स्थित पुरानी जेल अब राष्ट्रीय धरोहर के रूप विकसित हो रहा है. इसी जेल में अमर शहीद भगवान बिरसा मुंडा ने इसी जेल में अंतिम सांस ली थी. केंद्र और राज्य सरकार ने इस जेल को बिरसा मुंडा ऐतिहासिक संग्रहालय के रूप में बदलने का फैसला लिया है और निर्माण कार्य अब अंतिम चरण में है.
अंग्रेजों ने रांची के जिस पुरानी जेल भगवान बिरसा मुंडा को कैद किया गया था और जहां उन्होंने अंतिम सांसे भी ली थी, उसे राष्ट्रीय धरोहर के रूप में विकसित करने का काम तेजी से चल रहा है. यह संग्रहालय मौजूदा पीढ़ी के साथ आने वाली पीढ़ी भी बिरसा मुंडा के संघर्ष और आजादी की लड़ाई में उनकी योगदान को बताएगा.
करीब 35 करोड़ रुपये की राशि से भगवान बिरसा के इस स्मृति स्थल को संग्रहालय का आकार दिया जा रहा है. बिरसा मुंडा स्मृति पार्क में भगवान बिरसा मुंडा की 25 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित हो चुकी है. प्रतिमा का निर्माण प्रसिद्ध मूर्तिकार राम सुतार द्वारा किया गया है. गाजियाबाद में मूर्ति का निर्माण पूरा होने के बाद इसे रांची लाकर स्थापित भर कर दिया गया है.
जेल परिसर में बिरसा मुंडा की प्रतिमा के साथ-साथ झारखंड के 10 स्वतंत्रता सेनानियों की प्रतिमा भी नौ-नौ फीट की बनायी जा रही है. ये काम भी राम सुतार ही कर रहे हैं. अधिकांश प्रतिमाएं स्थापित हो चुकी है. पुराने जेल परिसर का स्वरूप लगभग बदल चुका है, जहां पहले घास-फूस व झाड़ियां थीं, अब वह जगह सुंदर पार्क के रूप में तब्दील होती जा रही है, पुरानी दीवारों को नया कर दिया गया है. जगह-जगह फूलों की क्यारियां बनायी गयी हैं. तरह-तरह के पेड़ व पौधे लगाये गये हैं.
बिरसा मुंडा संग्रहालय एवं स्मृति पार्क में भगवान बिरसा के जीवन वृतांत से जुड़ी स्मृतियों का भावनात्मक प्रदर्शन किया गया. बिरसा मुंडा संग्रहालय में झारखंड से जुड़े स्वतंत्रता सेनानियों की जीवनी का प्रदर्शन किया गया हे. मल्टी मीडिया के माध्यम से संग्रहालय के भूतल वाले पुराने बैरक में बिरसा मुंडा के जन्म से लेकर विद्रोह तक की घटनाओं से संबंधित फिल्म का प्रदर्शन किया जायेगा. फिल्म को इस ढंगा से तैयार किया गया है कि फिल्म पर्यटकों एवं दर्शकों के मानस पटल लंबे समय तक अंकित रह सकता है.
इसी प्रकार पुरानी जेल की दीवार पर लेजर शो के माध्यम से बिरसा मुंडा के गांव एवं डोंबारी बुरू और गया मुंडा से जुड़ी घटनाओं को प्रदर्शन किया जायेगा. बिरसा मुंडा स्मृति पार्क में पर्यटकों के आकर्षण के लिए फाउंटेन एवं वाटर शो का प्रदर्शन किया जायेगा. यह प्रदर्शन झारखंड के धार्मिक स्थल बाबाधाम देवघर, मां छिन्नमस्तिका मंदिर रजरप्पा, मां भद्रकाली मंदिर इटखोरी एवं पार्श्वनाथ से संबंधित होगा.
जेल के प्रशासनिक भवन में रिसेप्शन, इनफॉरमेशन कियोस्क, ऑफिस, सीसीटीवी, डिजिटल सेटअप रहेगा. जेल के महिला सेल में महिला कैदियों से संबंधित जीवनी दर्शायी जायेगी. साथ ही जनजातीय महिलाओं के पारंपरिक जेवर, गहने, पहनावा को प्रदर्शित किया जायेगा. संस्कृति भी दर्शायी जायेगी.
जिस कमरे में बिरसा मुंडा को बंदी के रूप में रखा जाता था, उसी रूम में बिरसा मुंडा की जीवनी से संबंधित फिल्म का प्रदर्शन किया जायेगा.जेल का अंडा सेल. अस्पताल और किचन को पुराने स्वरूप में संरक्षित किया जा रहा है. केवल दीवारों को मजबूती प्रदान की गयी है.
वहीं भगवान बिरसा मुंडा संग्रहालय में तब्दील होने वाले बिरसा मुंडा जेल के प्रवेशद्वार पर 1765 के कालखंड में आदिवासियों की स्थिति बयां होंगी. दूसरी ओर पास की ही एक अन्य गैलरी में ब्रिटिश औपनिवेशिक काल की परिस्थितियां रेखांकित की जाएंगी. इसी तरह जेल परिसर की दीवारों पर बिरसा मुंडा के गांव और डोम्बारी बुरू सहित गया मुंडा से जुड़े घटनाक्रमों को उकेरा जाजा रहा है. बिरसा मुंडा जेल के प्रथम तल के चार कमरों में से एक कमरे में भगवान बिरसा मुंडा के जीवन के अभिलेखीय दृश्यों का प्रदर्शन होगा.
दूसरे कमरे में बिरसा मुंडा के अनुयायियों के बारे में जानकारी रहेगी. शेष दो कमरों में उनके जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण घटनाओं को दर्शाया जाएगा. इसी तरह जेल के आंगन में झारखंड के 10 आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों की मूर्तियां स्थापित होंगी. उनके संबंध में लाइट एंड साउंड शो के माध्यम से जानकारी भी दी जाएगी.

