रांची: झारखंड की राजधानी रांची के आसपास मौजूद कई झरनों और जलप्रपात के पास बसे गांवों की जिंदगी भी कोरोना काल में थमती नजर आ रही है. राजधानी से तकरीबन 45 किलोमीटर दूर बसे अनगढ़ा प्रखंड में मौजूद जोन्हा फॉल यानि गौतमधारा का भी हाल भी कुछ ऐसा ही है.
बढ़ती गर्मी में 180 फीट ऊंचे पहाड़े से गिरने वाले पानी के शोर के साथ आमदनी का जरिया भी इन दिनों थम सा गया है. जोन्हा फॉल के आसपास बसे गांवों में भी हालात बेहद खराब होते जा रहे हैं. कुदरत की सुंदरता और सैलानियों के भरोसे चलने वाली यहां की जिंदगी बढ़ती गर्मी और कोरोना के संक्रमण के सामने थम सी गई है.
चारों तरफ जंगल और पहाड़ों से घिरे जोन्हा फॉल्स में गर्मी के दिनों में पानी नहीं गिरने से सैलानियों का पहुंचना कम हो जाता है. बावजूद इसके राज्य के अलावा बंगाल से भी लोग गर्मी के दिनों में पहाड़ और जंगलों में सुकून और शांति के लिए पहुंचते हैं.
इससे यहां के कारोबारियों का पूरा साल चल जाता है. लेकिन संक्रमण काल ने सैलानियों से होने वाली थोड़ी बहुत आमदनी पर भी ग्रहण लग गया है. जोन्हा फॉल के आसपास के चार गांवों के मजदूरों को संक्रमण काल ने भुखमरी के कगार पर पहुंचा दिया है.
जिलिंगसोरेंग गांव के रहने वाले सुखदेव मुंडा की मानें तो गांव में कुदरत की खूबसूरती तो है, लेकिन रोजगार के अन्य साधन नहीं है. ऐसे में पर्यटन कारोबार ही एकमात्र जरिया था, जो कोरोना की वजह से काफी कम हो चुका है.
दरअसल, जोन्हा फॉल के आसपास बसे चार गांवों गौतम धारा, कोनाडीह, हापातबेड़ा और जिलिंगसोरेंग की हजारों ग्रामीणों की आमदनी का जरिया खेती-बाड़ी के अलावा पर्यटन कारोबार ही है. गांव के कई लोगों की दुकानें भी फॉल्स में उतरने के रास्ते में ही है, जो इन दिनों पूरी तरह बंद है.
जोन्हा के इर्द-गिर्द बसे गांवों की महिलाएं सैलानियों को जंगली बेर, केंदुआ, भेलुआ और डहु जैसे फल बेचकर कुछ पैसे कमा लेती हैं, लेकिन इन दिनों सब कुछ बंद है. हालांकि कुछ पर्यटक जरूर जोन्हा की खामोशी को निहारते मिल जाते हैं.
गुमला से परिवार के साथ जोन्हा का दीदार करने वाले पवन सिंह की मानें तो गर्मी के दिनों में फॉल्स से पानी भले नहीं गिर रहा हो, लेकिन पहाड़ और जंगलों की खूबसूरती की बात ही अलग है. बढ़ती गर्मी ने पहाड़ी नदियों को भले ही निगल लिया हो, लेकिन जोन्हा के पहाड़ और जंगलों की खूबसूरती गर्मी में भी सैलानियों की खींचने की ताकत रखती हैं.
संक्रमण के डर ने जरूर पर्यटकों के कदम थाम लिए हैं. यहां के लोगों के साथ-साथ पर्यटकों को भी कोरोना संक्रमण काल खत्म होने का इंतजार है.

