रांची: मंगलवार को केन्द्रीय रोजगार गारंटी परिषद् की 21वीं बैठक का आयोजन वीडियो काॅन्फ्रेसिंग के माध्यम से हुई. केन्द्रीय कृषि व किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री एव पंचायती राज मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर की अध्यक्षता में बैठक का आयोजन किया गया.
झारखंड की ओर इस बैठक का नेतृत्व रांची की महापौर आशा लकड़ा ने किया. बैठक में मनरेगा के कार्यान्वयन की स्थिति एवं आगे के कार्यो के लिए रणनीति पर चर्चा की गई. इस संबंध में महापौर ने कई सुझाव रखे.
उन्होंने कहा कि झारखंड आदिवासी बहुल क्षेत्र हैं. यहां कोविड-19 के दौरान राज्य में अबतक लगभग साढे सात लाख मजदूर राज्य से बाहर काम करने गये थे, जो अब अपने घर वापस आ रहे हैं. ऐसे में सभी मजदूरों की जिलावार सूची तैयार कर की जानी चाहिए, साथ ही स्थानीय बेरोजगारों को कौशल विकास से जोड़कर व मजदूरों को मनरेगा से जोड़ा जाए, जिससे ज्यादा से ज्यादा लोगों को रोजगार मिल सकें. वही, कृषक के लिए स्थानीय स्तर पर वृहत बाजार और कोल्डस्टोरेज की व्यवस्था करने पर जोर दिया जाए. वहीं गांवों से शहर तक यातायात सुगम होने से कृषक को अनाज बिक्री करने में सुविधा के साथ बिचैलिये से भी मुक्ति मिलेगी. जिससे कृषक ज्यादा मुनाफा कमा सकेंगे. मनरेगा का जाॅब कार्डधारी मजदूरों को राज्य सरकार से रोजगार भत्ता दिया जाना चाहिए.
महापौर ने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में ग्रामीणों द्वारा दो से तीन किलोमीटर तक पैदल चलकर पीने का पानी लाने जाना पड़ता है. इसके लिए सरकार को गांवों में वर्षा जल का संचयन पर जोर देने की जरूरत है. वही गांव के छोटे-छोटे नदियों में बांध बनाकर लिफ्ट एरिगेशन से सिंचाई का साधन सुगम कराना चाहिए. बोराबांध के माध्यम से जल संचय निर्माण किया जा सकता है.
वही, जंगल को संरक्षित कर वन उपयोगी (फल, पत्ता, लकड़ी इत्यादी) सामग्राी के माध्यम से ग्रामीणों को रोजगार में बढ़ावा दिया जा सकता है.

