लोहरदगा: लोहरदगा के सेन्हा स्थित मिनी दुग्ध संग्रहण केंद्र को अनिश्चित काल के लिए बंद कर दी गई है. जिससे किसानों के समक्ष विकट परिस्थिति उत्पन्न हो गई है. सेन्हा प्रखंड में कोरोना वायरस संक्रमण दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है. जिसे देखते हुए किसानों के दुग्ध संग्रहण बन्द कर दिया गया.
उल्लेखनीय है कि दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाने वाला सेन्हा का महतो मुहल्ला में लगातार कोरोना संक्रमितों की संख्या में बढ़ोतरी के कारण पूरे क्षेत्र को ही कॉन्टेनमेन्ट जॉन घोषित कर दिया गया है.
मिनी दुग्ध संग्रह केंद्र का संचालक भी उसी मुहल्ले में रहता है. इस दुग्ध संग्रहण केंद्र में 80 से 85 किसानों के दुग्ध पहुंचते हैं. जानकारी मिली है कि सेन्हा बीएमसी तथा एमपीपी को मिलाकर करीब 1300 लीटर दूध संग्रह होता है. जबकि बीएमपी सेन्हा में 550 लीटर संग्रह किया जाता है.
वहीं आरया, चरहु एवं बदला एमपीपी संग्रह केंद्र से 750 लीटर भी सेन्हा के बीएमसी में पहुंचाया जाता है. यहां किसानों के समक्ष सबसे परेशानी का सबब है कि सभी दूध को शीतल कैसे किया जाए और दूध बर्बाद होने से बचाया जा सके.
साथ ही 750 लीटर दूध को अरु बीएमसी में ट्रांसफर किया गया. वहीं 80 से 85 किसानों का दुग्ध संग्रह की व्यवस्था नही हुआ जिससे किसान वर्ग के लोगों को काफी समस्या का सामना करना पड़ सकता है. जिसके कारण दूध उत्पादकों में काफी निराशा है. जितना दूध का उत्पादन हो रहा है. उसका खपत भी नहीं हो पाएगा. जिससे दूध उत्पादकों के समक्ष इन दिनों विकट स्थिति पैदा हो रही है.
सेन्हा पंचायत में दूध उत्पादन का हब माना जाता है. इस पंचायत में सैकड़ों किसान में 30 प्रतिशत अनुदान पर सरकार से दुधारु पशु मिले हैं. 85 लोग दूध उत्पादन के कार्य मे लगे हैं. लेकिन कोरोना वायरस के कारण दूध उत्पादन पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है.
सेन्हा बीएमसी के दुग्ध मित्रा पंकज कुशवाहा ने बताया कि यहां 85 पशुपालकों से लगभग प्रतिदिन सुबह शाम मिलाकर 550 लीटर तथा 750 लीटर एमपीपी केंद्र से दूध एकत्रित कर दूध में फैट आदि की मात्रा जांच कर रांची भेजा जाता है.
बता दें कि संक्रमण के बढ़ते प्रकोप से मनुष्य ही नही बल्कि पशुओं का चारा खरीदना भी मुश्किल हो गया है.

