रांचीः राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 2018 के नववर्ष की तैयारियों में जुटे सुरज पाण्डेय जब रांची के अरगोड़ा में पताका लगा रहे थे, तब बिजली के पोल की चपेट में आ गए. इस हादसे में वो अपनी दोनों पैर गंवा बैठे.
सुरज 6 महीने तक जिंदगी और मौत से जुझते रहे. इतनी बड़ी त्रासदी के बाद भी सुरज का संघ के प्रति समर्पण का भाव कम नहीं हुआ. वे कृत्रिम पैर लगाकर फिर से संघ की गणवेश पहनकर शाखा में पहुंच गए.
दूसरे स्वयंसेवक जब सुरज के प्रति सहानुभूति जताते तो वे कहते है, कि मैं सामान्य स्वयंसेवक की भांति शारीरिक योग व्यायाम कर सकता हूं. आज सुरज स्टील के पैरों के सहारे संघ की नियमित शाखा जाते है.
रांची महानगर में घोष प्रमुख का दायित्व है. वो अन्य स्वयंसेवकों की तरह खुद बाईक चलाकर लोगों से संपर्क करते है.
आज के महानगर एकत्रीकरण में वो गणशिक्षक की भूमिका निभा रहे थे. कार्यक्रम की तैयारियों में वो कल देर रात तक जुटे रहे और कार्यक्रम के पूर्व पूर्ण गणवेश में स्वयंसेवकों को योग व्यायाम का अभ्यास कराते रहें.
मैराथन रेस भी जीत चुके है सुरज, स्पोटर्स टीचर भी रह चुके है
2019 में कोलकाता में ऑटोबोट कंपनी के द्वारा पैरालिंपिक मैराथन में वो पहले स्थान पर रहे है. सुरज वर्तमान में नेशनल लेबल के राईफल शूटिंग प्रतिस्पर्धा की तैयारियों में जुटे है. वो कुछ दिनों पूर्व तक रांची के संत माईकल स्कूल में बतौर स्पोटर्स टीचर अपनी सेवा दे रहे थे, लेकिन राईफल शूटिंग में नेशनल लेबल का खिताब जीतने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे है.

