चिकित्सक ने कहा कि जितनी जल्दी डोनर मिले, बेहतर होगा
रांची:- झारखंड सरकार के मंत्री जगरनाथ महतो पिछले दो सप्ताह से अधिक समय से चेन्नई के एमजीएम अस्पताल में भर्ती है. उनकी देखरेख और इलाज में जुटे देश के विख्यात चिकित्सक डॉ. अपार जिन्दल ने बताया कि जगरनाथ महतो का लंग्स ट्रांसप्लांट ही एकमात्र ऑप्शन बचा है. जितनी जल्दी हो सके, लंग्स ट्रांसप्लांट हो जाए, यह उनके स्वास्थ्य और रिकवरी के लिए बेहतर होगा. उन्होंने बताया कि मंत्री जगरनाथ महतो की कंडिशन पहले से बेहतर है, लेकिन किसी तरह कॉम्पलीकेशन न बढ़े, इसके लिए जल्द से जल्द लंग्स ट्रांसप्लांट हो सके, अच्छा हो सके. उन्होंने जैसे ही डोनर मिल जाएगा, यह काम पूरा हो जाएगा. डॉ. जिन्दल ने यह भी जानकारी दी कि लगातार चिकित्सकों की टीम लगातार उनके स्वास्थ्य पर नजर बनाये हुए है और हर तरह की जांच निरंतर की जा रही है. उन्होंने कहा कि जितनी जल्दी डोनर मिलेगा, उनकी जल्दी एलोकेशन मिलेगा और हम ट्रांसप्लांट कर पाएंगे. जल्दी ट्रांसप्लांट होने पर ही बिना परेशानी के रिकवरी हो पाएगी, क्योंकि शिक्षा मंत्री का लंग्स अब पूरी तरह से काम करना बंद कर चुका है और स्थिति में कोई सुधार नहीं है.
इधर, राज्य के कृषि मंत्री बादल भी जगरनाथ महतो से मिलने एमजीएम चेन्नई गये थे और उनके लिए ब्लड भी डोनेट किया है. कृषि मंत्री ने कहा कि राज्य के सीएम पूरी तरह से चेन्नई एमजीएम के चिकित्सकों से वहां के मुख्यमंत्री के माध्यम से जुडे हुए हैं, उन्होंने बताया कि राज्य के मुख्य सचिव और स्वास्थ्य सचिव वहां के हाल का लगातार जायजा ले रहे हैं. उन्होंने बताया कि वे लगातार मुख्यमंत्री एवं अन्य मंत्रियों के संपर्क में हैं. साथ ही भारत सरकार के अधिकारियों एवं राज्य के अधिकारियों के साथ बात विचार कर जल्द से जल्द उनके लंग्स को बदलने की प्रक्रिया पर चर्चा की जा रही है. राज्य सरकार प्रयास कर रही है कि जल्द से जल्द उनके लिए डोनर मिल जाए, ताकि उनकी स्थिति में सुधार हो सके. उन्होंने बताया कि शिक्षा मंत्री को अभी आईसीयू में रखा गया है, जहां उनकी स्थिति सामान्य बनी हुई है. मंत्री बादल पत्रलेख ने लोगों से उनके लिए दुआ करने की भी अपील की है
गौरतलब है कि जगरनाथ महतो सितंबर के अंतिम सप्ताह में कोरोना संक्रमित हुए थे, जिसके बाद उन्हें रिम्स में भर्ती कराया गया था. रिम्स के बाद उन्हें रांची के मेडिका अस्पताल में भर्ती कराया गया. मेडिका में स्थिति में कोई सुधार नहीं होता देख उन्हें एयर एंबूलेंस से चेन्नई एमजीएम ले जाया गया था.

