दिल्ली: कोरोना के कारण से पूरे देश में लॉकडाउन है. इस कारण से सबसे ज्यादा परेशानी प्रवासी मजदूरों को हो रही है. मजदूरों को उनके घर पहुंचाने के लिए रेलवे रोजाना कई ट्रेनें चला रही है. इस सबके बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी जारी है. इन दिनों सबसे ज्यादा केंद्र और बंगाल सरकार के बीच तल्खी देखने को मिल रही है.
हाल ही में गृह मंत्रालय ने ममता सरकार को चिट्ठी लिखकर कई कोरोना से जुड़े कई मुद्दों पर नाराजगी जाहिर की थी, वहीं अब रेल मंत्री पीयूष गोयल ने भी पश्चिम बंगाल सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया है.
रेल मंत्री ने कहा है कि मेरे कल के बयान के बाद पश्चिम बंगाल जगी है और सात श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाने की अनुमति दी गई है. उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में बंगाल के मजदूर दूसरे राज्यों में फंसे हुए हैं. मैं वहां की सरकार से अपील करता हूं कि अधिक संख्या में ट्रेन चलाने की अनुमति दे.
रेल मंत्री ने कहा कि बंगाल के लिए रोजाना लगभग 105 ट्रेन चलाने की जरूरत है. जहां तक मेरी जानकारी है, वहां की सरकार ने पूरे 30 दिन में 105 ट्रेन चलाने की अनुमति देने जा रही है. यह पश्चिम बंगाल के मजदूरों के साथ क्रूर मजाक है.
आपको बता दें कि बीते दिनों पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पीएम मोदी की मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक के दौरान कहा था, ‘एक राज्य के तौर पर हमले कोरोना संक्रमण से लड़ने में अपना बेहतर कर रहे हैं.
केन्द्र को इस मुश्किल घड़ी में राजनीति नहीं करनी चाहिए.’ ममता ने कहा था कि हम अंतरराष्ट्रीय सीमाओं और अन्य बड़े राज्यों घिरे हुए हैं और इसका सामना करना चुनौतीपूर्ण है. उन्होंने कहा कि सभी राज्यों को बराबर का महत्व मिलना चाहिए और हमें टीम इंडिया की तरह काम करना चाहिए.

