दिल्ली: महेंद्र सिंह धोनी भारतीय क्रिकेट का वो नाम है जिसने भारत को विश्व कप दिलाने के अलावा कई बड़ी उपलब्धियां दिलाई. उनका मुश्किल परिस्थितियों में कूल अंदाज उन्हें बाकियों से अलग बनाता है. इसलिए धोनी को विराट कोहली कूल भी कहा जाता था.
लेकिन मैदान पर शांत और सहज दिखने वाले धोनी को भी दबाव महसूस होता है. उन्हें भी लगता है कि मानसिक बीमारी के बारे में गंभीरता से सोचना चाहिए. धोनी ने कहा कि अभी भी खिलाड़ी मानसिक बीमारी के बारे में खुलकर बात करने से हिचकिचाते हैं.
भारतीय टीम से करीब 10 महीने से बाहर चल रहे विकेटकीपर बल्लेबाज महेंद्र सिंह धोनी ने एफोर की ओर से आयोजित मेंटल कंडिशनिंग प्रोग्राम में हिस्सा लिया. इस दौरान महेंद्र सिंह धोनी ने मानसिक तनाव से लेकर मानसिक बिमारी पर खुलकर बात की.
धोनी ने कहा कि मुझे लगता है कि भारत में अब भी ये स्वीकार करना बड़ा मुद्दा है कि मानसिक पहलू को लेकर कोई कमजोरी है लेकिन आमतौर पर हम इसे मानसिक बीमारी कहते हैं. कोई भी असल में ये नहीं कहता कि जब मैं बल्लेबाजी के लिए जाता हूं तो पहली पांच से दस गेंद तक मेरे दिल की धड़कन बढ़ी होती हैं.
मैं दबाव महसूस करता हूं. मैं थोड़ा डरा हुआ भी होता हूं. क्योंकि सभी इसी तरह महसूस करते है. धोनी ने कहा कि ये छोटी सी समस्या है. लेकिन काफी बार हम कोच को ये सब कहने में हिचकिचाते हैं. यही वजह है कि किसी भी खेल में कोच और खिलाड़ी का रिश्ता काफी अहम होता है.
धोनी ने कहा मेंटल कंडिशनिंग कोच सिर्फ 15 दिन के लिए टीम के साथ नहीं होना चाहिए. क्योंकि 15 दिन में तो सिर्फ आप अपना अनुभव ही बांट सकते हैं. अगर मेंटल कंडिशनिंग कोच हर वक्त टीम के साथ रहेंगे तो इससे वो खिलाड़ियो को अच्छी तरह समझ सकते हैं. इससे वो ये समझ सकते हैं वो कौनसी कमियों जो खिलाड़ी का खेल प्रभावित कर रही हैं.
टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली भी मानते हैं कि खिलाड़ियों को शारीरिक फिटनेस के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य पर भी ध्यान देना चाहिए. विराट ने कहा था कि मुझे लगता है कि मानसिक स्वास्थ्य और मानसिक स्पष्टता सिर्फ खेल ही नहीं बल्कि जीवन में भी सबसे महत्वपूर्ण पहलू है.

