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आंदोलन में शामिल किसान की बेटी की शादी आज, वीडियो कॉल पर देखेंगे शादी

by bnnbharat.com
December 3, 2020
in समाचार
लाखों के इनामी नक्सल जोड़े ने जंगल से भाग कर की शादी
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नई दिल्ली: नई कृषि नीतियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का गुरुवार को आठवां दिन है और किसान नेताओं ने एक बार फिर अपनी मांगों को दोहराया है. वे केंद्र सरकार के साथ एक और दौर की बातचीत के लिए मिलेंगे. दिल्ली के कई अलग-अलग बॉर्डर पर विरोध प्रदर्शन चल रहा है. इनमें से एक दिल्ली-हरियाणा सिंघु बॉर्डर पर सुबह की प्रार्थना के बाद विरोध शुरू हुआ. यहां बैरिकेडिंग के अलावा सुरक्षा का एक घेरा और बढ़ा दिया गया है लेकिन किसान अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने को राजी नहीं हैं. किसान अपने घर का सारा कामकाज छोड़कर प्रदर्शन में डटे हुए हैं. एक ऐसे ही किसान हैं सुभाष चीमा जिनकी बेटी की शादी है लेकिन वे इसमें शामिल नहीं होंगे क्योंकि उनके लिए किसानों की आवाज उठाना ज्यादा जरूरी है.

वीडियो कॉल पर देखेंगे बेटी की शादी

पंजाब और हरियाणा के अंदरूनी इलाकों से आए हजारों किसान दिल्ली की सीमाओं पर 26 नवंबर से विरोध प्रदर्शन पर बैठे हैं. वे हरियाणा की सिंघु, टिकरी सीमा और उत्तर प्रदेश की गाजीपुर और चिल्ला सीमाओं पर डेरा डाले हुए हैं. इनमें एक हैं सुभाष चीमा जो उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले से गाजीपुर बॉर्डर पर पहुंचे हैं और आंदोलन में शामिल हुए हैं. चीमा पिछले 5 दिन से आंदोलन में डटे हुए हैं. गुरुवार को दिल्ली से 111 किमी दूर अमरोहा में उनकी बेटी की शादी है लेकिन चीमा ने फैसला किया है कि वे इसमें शामिल नहीं हो सकेंगे. वे वीडियो कॉल के जरिये शादी में शामिल हो सकेंगे और शहनाई की आवाज भी उन्हें फोन पर ही सुनाई देगी.

सुभाष चीमा ने कहा कि आज वे जो कुछ भी हैं अपनी खेती-किसानी की वजह से हैं. जिंदगी भर उन्होंने खेती का काम किया और इसी से उनका परिवार चलता है. ऐसी स्थिति में वे किसान आंदोलन ‘दिल्ली चलो’ से अपनी नजरें नहीं मोड़ सकते और इसे बीच में छोड़कर नहीं भाग सकते. चीमा ने कहा कि गुरुवार को उनकी बेटी की शादी है लेकिन वे इसमें हिस्सा नहीं ले पाएंगे. 58 साल के सुभाष चीमा भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के सदस्य हैं और कई वर्षों से इससे जुड़े रहे हैं. देश के अलग-अलग कई संगठनों की तरह बीकेयू भी दिल्ली चलो आंदोलन में शामिल हुआ है.

बेटे-रिश्तेदार करेंगे शादी का इंतजाम

सुभाष चीमा की बेटी की शादी के इंतजाम कैसे होंगे जब वे खुद अमरोहा से कई किमी दूर दिल्ली-गाजियाबाद बॉर्डर पर धरने पर बैठे हैं. इसके जवाब में चीमा का कहना है कि घर पर कई लोग हैं जो शादी का प्रबंध करेंगे. गांव पर होने वाली इस शादी के लिए चीमा ने अपने रिश्तेदारों और बेटे को इंतजाम देखने का जिम्मा दिया है. चीमा खुद भी हर दिन अपनी बेटी से फोन पर बात करते हैं. बेटी अपने पिता को बुला रही है लेकिन चीमा का मानना है कि वे अपने किसान भाइयों को इस स्थिति में छोड़कर घर नहीं जा सकते. उनका कहना है कि किसान आंदोलन अपने निर्णायक दौर में है क्योंकि सरकार से बात चल रही है जिसका फैसला कभी भी आ सकता है.

सुभाष चीमा बीकेयू के पदाधिकारी हैं जो अमरोहा का प्रतिनिधित्व करते हैं. गाजीपुर बॉर्डर पर बैठे कई किसान भाइयों ने उनसे शादी में शामिल होने का आग्रह किया है लेकिन उन्होंने इसे ठुकरा दिया. उन्होंने अपने बेटों से कहा है कि शादी की हर रस्म उन्हें वीडियो कॉल के जरिये दिखाई जाए ताकि उन्हें ऐसा न लगे कि वे इससे वंचित हैं. धरना स्थल पर बैठे किसानों का कहना है कि चीमा इसलिए घर नहीं जाना चाहते क्योंकि इससे किसान बिरादरी में गलत संकेत जाएगा कि पदाधिकारी स्तर का कोई व्यक्ति ही जब आंदोलन छोड़ दे तो बाकी लोगों का क्या होगा.

प्रदर्शन में खिलाड़ी, पहलवान और गायक भी शामिल

सुभाष चीमा की तरह कई किसान हैं जो कई किमी का फासला तय कर दिल्ली सीमा तक पहुंचे हैं और अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद कर रहे हैं. पंजाब के एक दर्जन से अधिक कबड्डी खिलाड़ी, पहलवान और गायक इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए हैं. इन्होंने हजारों प्रदर्शनकारियों के साथ 32 से अधिक किसान यूनियनों को अपना समर्थन दिया है. खिलाड़ी, पहलवान और लोकप्रिय पंजाबी गायक रवींद्र ग्रेवाल दिल्ली-चंडीगढ़ मार्ग पर सिंघु बॉर्डर पर किसानों के विरोध प्रदर्शन में शामिल हो गए हैं. सिंघु बॉर्डर पर भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) और अन्य किसान यूनियनें 26 नवंबर से विरोध कर रही हैं.

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