दिल्ली: तबलीगी जमात के नेता मौलाना साद के क्वारंटाइन की मियाद सोमवार को ख़त्म हो गई. माना जा रहा है कि अब मौलाना साद और उनके 6 और साथी दिल्ली पुलिस की जांच में मदद करेंगे. मौलाना साद पर आरोप है कि देशव्यापी लॉकडाउन के बावजूद उन्होंने दिल्ली के निजामुद्दीन के मरकज में लोगों को जमा किया था. 56 साल के मौलाना साद 28 मार्च से आईसोलेशन में थे. 8 अप्रैल को उनके वकील ने कहा था कि एक बार उनका आईसोलेशन पीरियड खत्म हो जाए तो वो पुलिस की जांच में सहयोग करेंगे.
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मौलाना साद पर आरोप है कि उन्होंने मुसलमानों को खासतौर पर तबलीगी जमात से नाता रखने वालों को सोशल डिस्टेंसिंग के खिलाफ भड़काया था. अपने समर्थकों को उन्होने कहा था कि डॉक्टरों के कहने से नमाज पढ़ना बंद मत कर देना. उन्होंने कहा कि उनके साथ 70 हजार फरिश्ते हैं और अगर ये फरिश्ते उन्हे नहीं बचा सकते तो कौन बचा सकता है. इस भाषण में उन्होंने अपने समर्थकों को कहा कि यह दूरी बनाने का नहीं, बल्कि करीब आने का समय है.
हालांकि बाद में उन्होने एक ऑडियो मैसेज जारी कर यह दावा किया कि वो डॉक्टर्स की सलाह पर आईसोलेशन में हैं. प्रशासन का कहना है कि देश में कुल कोरोना वायरस के मामलों में से कम से कम 1000 तबलीगी जमात से संबधित हैं. तबलीगी जमात में कोरोना वायरस से संक्रमित लोग पाए जाने के बाद, देश भर में कोरोना वायरस फैलने के लिए मुसलमानों को निशाना बनाया गया.
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दक्षिणपंथी संगठनों ने इस घटना का लाभ उठा कर तबलीगी जमात के बहाने कोरोना वायरस के लिए मुसलमान धर्म मानने वालों को जिम्मेदार ठहराया. इसी बहाने उन लाखों मजदूरों का मसला भी बेमानी बनाने की कोशिश की गई जो सैंकड़ों किलोमीटर भूखे प्यासे चल कर अपने घरों तक पहुंचे.

