खास बातें:-
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कोल व आयरन ओर की खदानों में फंसा है पेंच, डेढ़ लाख करोड़ की परियोजनायें लंबित
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पावर प्लांट के लिए आबंटित राजबार और बनहर्दी कोल ब्लॉक से भी अब तक खनन नहीं हो पाया शुरू
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4600 एकड़ में फैले बनहर्दी कोल ब्लॉक में 1500 मिलियन टन कोयले का है अनुमान
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35 साल तक पावर प्लांट के लिए उपलब्ध हो सकता है कोयला
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राजबार कोल ब्लॉक में 500 मिलियन टन कोयला होने का लगाया गया है अनुमान
रांचीः झारखंड के हाथ से दो कोल ब्लॉक निकल चुके हैं. पावर प्लांट के लिए आबंटित मौर्या और केरेनडारी कोल ब्लॉक का आबंटन रद्द कर दिया गया है. तिलैया अल्ट्रा मेगा पावर प्लांट के लिए केरेनडारी और बिजली बोर्ड को मौर्या कोल ब्लॉक आबंटित किया गया था.
मौर्या कोल ब्लॉक 26 जून 2009 को आबंटित हुआ था, लेकिन इसके 10 साल बाद भी इसका परिचालन शुरू नहीं हो पाया. वहीं 6 दिसंबर 2015 को बनहर्दी कोल ब्लॉक का आबंटन मिला था. इस कोल ब्लॉक के कोयले का उपयोग पतरातू में बन रहे 4000 मेगावाट के पावर प्लांट में किया जाना है.
पावर प्लांट बनने में दो साल की देरी हो गई है. इस कारण खनन शुरू नहीं हो पाया है. कोल ब्लॉक में मौजूद कोयले की कीमत 40 से 42 हजार करोड़ रुपये आंकी गई है.
डेढ़ लाख करोड़ की परियोजनायें लंबित
कोल ब्लॉक व आयरन ओर की खदानों में पेंच फंसे होने के कारण राज्य में लगभग डेढ़ लाख करोड़ की परियोजनायें लंबित हैं. 79 कोल ब्लॉक व आयरन ओर को खनन का लाइसेंस नहीं मिला है. सिर्फ 19 कंपनियों को ही पीएल लाइसेंस (खनन से पहले ड्रिल कर खनिज का पता लगाने का लाइसेंस) मिला.
ओएनजीसी और आइओसी को हजारीबाग, बोकारो और धनबाद में कोल बिड मिथेन की निकासी के लिये पेट्रोलियम एक्सप्लोजन का लाइसेंस मिला है.
वहीं खदानों में पेंच होने के कारण हर माह 50 करोड़ रुपये वाणिज्य कर का नुकसान हो रहा है. खनिजों से पांच फीसदी वाणिज्य कर की प्राप्ति होती है.
1500 मिलियन टन कोयले का है अनुमान
लातेहार के चंदवा में 4600 एकड़ में बनहर्दी कोल ब्लॉक है. बनहर्दी कोल ब्लॉक से 35 साल तक पावर प्लांट के लिये कोयला उपलब्ध होता. हर साल 10 मिलियन टन कोयला निकालने का लक्ष्य रखा गया था. इस हिसाब से 35 साल में 350 मिलियन टन कोयला निकाला जाता.
बनहर्दी कोल ब्लॉक के 10 वर्ग किलोमीटर में ड्रिलिंग हो चुकी है. इसमें 900 मिलियन टन कोयला का अनुमान लगाया गया है. शेष आठ वर्ग किलोमीटर में 600 मिलियन टन कोयले का अनुमान लगाया गया है. हरियाणा की साउथ वेस्ट पिनाकल कंपनी ने 10 वर्ग किलोमीटर में ड्रिलिंग की है.
टीवीएनएन के विस्तारीकरण का काम भी लटका
टीवीएनएव के विस्तारीकरण का काम शुरू नहीं होने के कारण राजबार कोल ब्लॉक का परिचालन शुरू नहीं हो पाया है. टीवीएनएल को लातेहार के समीप राजबार कोल ब्लॉक आबंटित किया था. इसमें 500 मिलियन टन कोयले का अनुमान लगाया गया है.
इसका माइनिंग प्लान भी केंद्र को भेज दिया गया है. टीवीएनएल में विस्तारीकरण की तरह 660 मेगावाट की दो यूनिटें लगाई जानी हैं. लगभग दो साल पहले टीवीएनएल के विस्तारीकरण को कैबिनेट से मंजूरी मिली थी.
क्यों रद्द हुआ मौर्या कोल ब्लॉक का आबंटन
तत्कालीन बिजली बोर्ड को मौर्या कोल ब्लॉक आबंटित किया गया था. यह कोल ब्लॉक भवनाथपुर में लगने वाले 1320 मेगावाट के पावर प्लांट के लिये मिला था. इसमें 225 टन कोयले का अनुमान लगाया गया. सीएमपीडीआई से 8 करोड़ में जूलॉजिकल रिपोर्ट खरीदी गई थी. लेकिन यह प्रोजेक्ट ही खत्म हो गया.
इन कंपनियों को पीएल लाइसेंस
- जेएसडब्ल्यू- आयरन ओर व मैगनीज
- टीवीएनएल- कोयला
- श्यामल साव- फे लास्फर
- एमएमटीसी- कोयला
- सीएससी- कोयला
- ऊजंदल- कोयला
- एस्सार- आयरन
- टाटा स्टील- आयरन
- बंगाल एम्टा- कोयला
- राजकुमार साह- लाइम स्टोन

