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अस्पताल प्रबंधन द्वारा जीवन रक्षक दवाइयों के साथ खिलवाड़

by bnnbharat.com
December 11, 2020
in समाचार
अस्पताल प्रबंधन द्वारा जीवन रक्षक दवाइयों के साथ खिलवाड़
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गरीब व असहाय दवा की खातिर काट रहे अस्पताल का चक्कर

चतरा:- सरकार गरीब व असहाय मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने को लेकर प्रत्येक वर्ष स्वास्थ्य केंद्रों में लाखों की दवाइयां मुहैया कराती है. परन्तु ये जीवन रक्षक दवाएं गरीबों तक कितनी पहुंच पाती है इसकी बानगी चतरा जिले के सिमरिया रेफरल अस्पताल में देखने को मिली. 

दरअसल मरीजों के बीच वितरण के अभाव में अस्पताल के एक जर्जर कमरे में बड़ी मात्रा में रखी गई महत्वपूर्ण दवाइयां सड़ गयी. ये नष्ट हो चुकी दवाएं अस्पताल प्रबंधन के घोर लापरवाही की बयां करने के लिए काफी है. इसकी कीमत हजार दस-बीस हजार नहीं बल्कि लाखों में है. बताया जाता है कि दवाइयों की एक्सपायरी डेट वर्ष 2011- 12 की है. इन अनुपयोगी दवाओं में एंपीसिलीन इंजेक्शन, डीडीटी पाउडर, एसकेनीडाजोल टेबलेट, सिप्रोफ्लाक्सासिन टेबलेट, डेप्रोटॉन टेबलेट, लोटस- 50 टेबलेट, आरएल, एनएस की स्लाइन समेत डीडीटी पॉउडर 40 बैग व एंपीसिलीन इंजेक्शन लगभग 50 पैकेट सहित भारी मात्रा में अन्य दवाईयां शामिल है. 

बताते हैं कि इधर अस्पताल प्रबंधन द्वारा मरीजों को दवाओं की किल्लत जाहिर करते हुए बाहर की दवा दुकानों का भी रास्ता दिखा जाता है. ये हाल केवल सिमरिया रेफरल अस्पताल का ही नहीं बल्कि जिले के तकरीबन सभी अस्पतालों में हर साल इसी तरह लाखों रुपए की दवाइयां एक्सपायरी होकर धूल फांकती रहती है अथवा फेंक दी जाती हैं. इससे साफ जाहिर होता है कि स्वास्थ्य विभाग मरीजों के प्रति कितना सवेंदनशील है. 

दूसरी ओर एक समाजसेवी आलोक रंजन इस पूरे मामले का ठीकरा अस्पताल प्रबंधन पर फोड़ते हुए कहते हैं सिर्फ अपनी निजी स्वार्थों के कारण आज गरीब व असहाय मरीज इस जीवन रक्षक दवाओं के अभाव में काल कलवित हो रहे हैं. वहीं दूसरी तरफ चतरा उपायुक्त दिव्यांशु झा ने इसे गंभीरता से लेते हुए पूरे मामले की जांच की बात कही है.

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