नई दिल्ली: सरकारी स्कूल और सरकारी टीचरों को लेकर तरह-तरह के चुटकुले बनाए जाते हैं. कोई कहता है कि सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे नक्सली बनते हैं तो कोई कुछ और कहता है. लेकिन आरटीआई से एक बड़ा खुलासा हुआ है कि सरकारी स्कूलों में टीचरों की बेहद कमी है. आरटीआई का जवाब मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) ने दिया है. मंत्रालय के अनुसार पढ़ाने के लिए टीचरों की कमी है. देशभर के सरकारी स्कूलों में 10 लाख से ज्यादा टीचरों के पद खाली चल रहे हैं. टीचरों के मामले में कई राज्यों की हालत तो बेहद ही खराब है.
देश में टीचरों की कमी का ऐसे हुआ खुलासा
फरीदाबाद, हरियाणा निवासी आरटीआई कार्यकर्ता ओपी धामा ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) से देश के बेसिक शिक्षा विभाग से संबंधित कुछ सवालों की जानकारी मांगी थी. ओपी धामा ने पूछा था कि कक्षा एक से लेकर 8 तक के सरकारी स्कूलों में तैनात टीचरों की संख्या कितनी है. वर्तमान में कितने टीचर स्कूलों में बच्चों को पढ़ा रहे हैं. वहीं अलग-अलग राज्यों में टीचरों के खाली पदों की संख्या कितनी है. जिसके जवाब में एमएचआरडी ने बीते 7 साल की जानकारी देते हुए बताया है कि देशभर में 10 लाख से ज्यादा टीचरों की कमी बनी हुई है.
सर्व शिक्षा अभियान में भी नहीं हैं टीचर
एमएचआरडी से आए आरटीआई के जवाब की मानें तो कक्षा 1 से 8 तक बेसिक शिक्षा विभाग से संचालित होने वाले स्कूलों में राज्य सरकार और सर्व शिक्षा अभियान (एसएसए) के तहत टीचरों की नियुक्ति होती है. एसएसए का बजट केन्द्र सरकार की मदद से मिलता है. लेकिन राज्यों में दोनों ही तरह के टीचरों की हालत ठीक नहीं है. राज्य सरकार के अधीन आने वाले टीचरों की कमी 5.30 लाख है तो एसएसए के अंतर्गत आने वाले 4.91 लाख टीचरों का टोटा है.

