रांची: देश-प्रदेश में सामान्य तौर पर जनप्रतिनिधियों के बारे में यह आम धारणा बन गयी है कि राजनेता केवल चुनाव के वक्त ही अपने निर्वाचन क्षेत्र में आम जनता से वोट मांगने के लिए हाथ जोड़े खड़े नजर आते है और फिर चुनाव के बाद पांच वर्ष बाद ही क्षेत्र में नजर आते है. लेकिन इस आम धारणा के विपरित कुछ जन प्रतिनिधि लगातार अपने क्षेत्र में सक्रिय रहते है और क्षेत्र के लोगों की समस्याओं के लिए सदैव तत्पर भी नजर आते हैं. झारखंड में भी एक ऐसे जनप्रतिनिधि के रूप में जरमुंडी के कांग्रेस विधायक सह राज्य के कृषि,पशुपालन, मत्स्य एवं सहकारिता मंत्री बादल की विशिष्ट पहचान बन गयी है.
जनसेवा के लिए परिवार का त्याग कर खुद को समाजसेवा के लिए समर्पित कर देने वाले बादल की दिनचर्या मंत्री बनने के बाद भी नहीं बदली है. मंत्री बनने के बाद बादल के पास विधानसभा क्षेत्र के अलावा राज्यभर के लोग उनके मोबाइल पर फोन कर अपनी समस्याएं रखते है. दिनभर विभागीय बैठक और सरकारी संचिकाओं के निष्पादन के कारण अपनी व्यस्तताओं के बीच मोबाइल फोन पर आने वाले कई कॉल को रिसीव नहीं कर पाते है, लेकिन उनके कार्यालय की टीम के तीन सदस्य हर मिसकॉल का हिसाब रखते हैं और विधानसभा क्षेत्र से फोन करने वाले हर लोगों से आग्रह किया जाता है कि वे अपने मोबाइल को ऑन रखेंगे और देर रात भी मंत्री उन्हें कॉलबैक करते है, तो फोन जरूर रिसीव करें. मंत्री कई बार देर रात दो-ढ़ाई बजे तक क्षेत्र के लोगों को कॉलबैक कर उनकी समस्याएं सुनते हैं और समाधान को लेकर समुचित कार्रवाई का भरोसा दिलाते हैं.
इस बीच लॉकडाउन में मंत्री बादल रांची से अपने क्षेत्र में नहीं जा पा रहे हैं, लेकिन उनकी टीम के सदस्य क्षेत्र से आने वाले फोन कॉल के अनुसार हर जरूरतमंद परिवारों तक अनाज, दवा और अन्य आवश्यक वस्तुओं पहुंचायी जा रही हैं. मंत्री खुद इस संबंध में अपने कार्यकर्त्ताओं को आवश्यक दिशा-निर्देश देते है और संकट की घड़ी में चलाये जा रहे सारे राहत कार्यों की खुद मॉनिटरिंग करते है. इन कार्यों के कारण प्रतिदिन मंत्री बादल को बिस्तर पर सोने के लिए जाने में रात दो से ढ़ाई से तीन बज जाता है.
घर-परिवार का त्याग कर देने वाले मंत्री बादल जब अपने विधानसभा क्षेत्र जरमुंडी में जाते है, तब उनका ठिकाना क्षेत्र सुदूरवर्ती ग्रामीण क्षेत्र का कोई पंचायत भवन होता है, तो कभी किसी स्कूल या अन्य कार्यकर्त्ताओं के घर या सरकारी भवनों में विश्राम करते है. इस दौरान गांव के ही कुछ कार्यकर्त्ता उनके लिए भोजन का इंतजाम करते है, वहीं कभी-कभी रात में उन्हें भूखे पेट सो जाना पड़ता है. इसके बावजूद क्षेत्र के हर लोगों से उनका सीधा जुड़ाव होता हैं और क्षेत्र में किस परिवार के समक्ष क्या परेशानी है, इसकी जानकारी उन्हें बिना बताएं मिल जाती है और उस परिवार तक सहायता भी पहुंच जाती हैं.

