घर छोड़ कर भागने वाली नाबालिग बच्चियों पर नन्हे फरिश्ते और मेरी सहेली टीम की रहती है कड़ी नजर
रांची: झारखंड से काम की तलाश में बड़े शहरों के लिए पायलन आम बात हो गयी है. विशेषकर नाबालिग लड़कियां बाहरी दुनिया की चमक-दमक को देखकर काम की तलाश में दिल्ली और अन्य बड़े शहरों के लिए चुपचाप घर से भागकर निकल जाती है, ऐसे लोगों पर नजर रखने के लिए रांची रेल मंडल की ओर से ‘‘नन्हे फरिश्ते’’ और ‘‘मेरी सहेली’’ नामक दो अलग-अलग टीमों का गठन किया गया है.
इन टीम के सदस्यों द्वारा ऐसे बच्चों और महिलाओं पर कड़ी नजर रखी जाती है. इसी क्रम में रविवार देर रात को घर से भाग कर दिल्ली जा रही एक नाबालिग बच्ची को रोका गया और उसे घर वालों के हवाले कर दिया गया.
प्राप्त जानकारी के अनुसार, उप निरीक्षक विजय कुमार यादव रविवार देर शाम को टीम के सदस्यों के साथ ट्रेन संख्या 02453 में ड्यूटी में कार्यरत थे. इसी दौरान ट्रेन ड्यूटी के दौरान प्रेम सोलंकी प्रभारी टी टी ने जांच की दौरान कोच संख्या ए-2 के सीट संख्या-51 में 17वर्षीय एक अकेली लड़की को सीट पर बैठे देखा.
पूछताछ में यह जानकारी मिली कि उसके पास न ही यात्रा करने के लिए को टिकट या पास नही था न ही कोई पहचान पत्र पाया. उसके उपरांत टी.टी के द्वारा अग्रिम कार्यवाही के लिए उप निरीक्षक को सुपुर्द कर दिया गया. उस बच्ची से पूछताछ करने पर उसने बताया कि वह घर में बिना बताए घर से भाग कर दिल्ली काम करने के लिए जा रही है. नाम पता पूछने पर उसने अपने पिता का नाम और पता टंकी साइड धुर्वा रांची होना बताया.
उससे उसके पिता का मोबाईल नंबर लिया गया और उसपर संपर्क कर उनको उनकी बच्ची के बारे में अवगत करवाया गया तथा उन्हें बरकाकाना रेलवे स्टेशन बुलाया गया. रात करीब 11 बजे बच्ची के पिता, माता व बड़े भाई आये जिन्हें जी.आर.पी प्रभारी, आर.पी.एफ प्रभारी, चाइल्ड लाइन बरकाकाना के समक्ष सही सलामत सुपुर्द कर दिया गया.
इससे पहले शनिवार को भी “मेरी सहेली “ दस्ते ने रांची रेलवे स्टेशन पर रात्री करीबन 10 बजे एक 14 वर्षीय नाबालिग लड़की को अकेली प्लेटफार्म संख्या 1 पर घूमते मिलने पर उससे पूछताछ की, तो बताया गया कि वह अपने घर से भाग कर जयपुर राजस्थान जाने के लिए आईं थी एवं उसके पास कोई टिकट भी नहीं था. उसे भी रांची चाइल्डलाइन को “नन्हें फरिश्ते“ टीम द्वारा सुपुर्द किया गया.

