रांची: पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री मिथिलेश कुमार ठाकुर रांची के बिरसा मुंडा हवाईअडडा पहुंचकर लेह से लौटे झारखंड के प्रवासी मजदूरों का स्वागत किया.
इस मौके पर उन्होंने बातचीत कर प्रवासी मजदूरों का हाल-चाल लिया. हवाईअडडा पर ही सभी प्रवासी श्रमिकों के लिए भोजन के पैकेट तथा पानी की व्यवस्था की गई थी.
उन्होंने कहा कि हवाई जहाज से प्रवासी मजदूरों को लाने का सिलसिला हेमंत सरकार में पूर्व में ही शुरू हो चुका है. मुख्यमंत्री द्वारा प्रवासी मजदूरों को राज्य सरकार अपने प्रयासों से दुर्गम स्थानों में फंसे हुए प्रवासी मजदूरों को हवाई मार्ग से झारखंड लाने की व्यवस्था निरंतर कर रही है.
पेयजल मंत्री मिथिलेश कुमार ठाकुर ने कहा कि वैसे सभी दुर्गम इलाकों जहां परिवहन के साधन मौजूद नहीं है, वहां से प्रवासी मजदूरों को हवाई जहाज से निरंतर वापस झारखंड लाया जा रहा है और जब तक हमारे सभी झारखंडी प्रवासी मजदूर नहीं आ जाते तब तक यह क्रम चलता रहेगा.
इस निमित राज्य के अधिकारी अन्य राज्यों से लगातार समन्यव बनाकर कार्य कर रहे हैं. पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री मिथिलेश ठाकुर के साथ कृषि मंत्री बादल पत्रलेख भी बिरसा मुंडा हवाई अड्डे पर मौजूद थे.
मंत्री मिथिलेश कुमार ठाकुर ने कहा कि राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जी के प्रयासों से ही यह सब संभव हो पा रहा है तथा पूरे देश में यह संदेश गया है कि गरीब, मजदूरों, लाचारों की सुध लेने वाली कोई सरकार अगर है तो वो हेमंत सोरेन की सरकार है. हेमंत सोरेन की सरकार ने विषम परिस्थितियों में भी ट्रेन एवं हवाई जहाज से प्रवासी मजदूरों को सकुशल उनके घरों तक पहुंचाने का कार्य किया है.
हवाई मार्ग से भी मजदूरों को वापस लाने के लिए सबसे पहले इसकी शुरुआत झारखंड ने ही की थी. मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रवासी मजदूरों को अपनेे राज्य वापस लाने के लिए कटिबद्ध है और लगातार कुछ दिनों के अंतराल पर हवाई जहाज से प्रवासी मजदूरों को झारखंड लाया जा रहा है.
मंत्री ने कहा कि पूर्व में भी हवाई जहाज से प्रवासी मजदूरों को लाया गया है. पिछले कुछ दिनों में राज्य सरकार विभिन्न स्थानों पर फंसे लाखों प्रवासी मजदूरों को सकुशल उनके घरों तक पहुंचा चुकी है. प्रवासी मजदूरों के आने का क्रम जारी है.
इसी क्रम में आज लेह से 55 प्रवासी श्रमिकों का जत्था लेकर विमान रांची पहुंचा. सभी प्रवासी मजदूरों की स्क्रीनींग करने के बाद उन्हें भोजन का पैकेट, पानी देकर पूरे सम्मान के साथ बसों से उनके गंतव्य के लिए रवाना किया गया.

