रांची: राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि झारखंड विधानसभा के गठन के 20 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं. आज का स्थापना दिवस हम सभी के लिए अपनी उपलब्धियों पर प्रसन्नता व्यक्त करने के साथ ही कमियों पर मंथन एवं चिंतन करने का भी अवसर प्रदान करता है. सभा से आम जनता की अपेक्षायें हैं और आवश्यकता हैं. आत्मचिंतन करने का, मंथन करने का कि उन अपेक्षाओं को पूरा करने में हम किस हद तक सफल हुए हैं. वे रविवार को झारखंड विधानसभा के स्था पना दिवस समारोह में बतौर मुख्यह अतिथि बोल रही थीं.
राज्यपाल ने कहा कि राज्य की जनता न सिर्फ हमारे कार्यकलाप को देखती है, बल्कि इस ग्लोबलाइजेशन के युग में वैश्विक स्तर पर और राष्ट्रीय स्तर पर हो रहे विकास कार्यों का भी अवलोकन करती हैं. समीक्षा करती है और तद्नुसार अपनी स्थिति को आंकने की कोशिश भी करती है.

इस अवसर पर यह भी उल्लेख करना चाहूंगी कि निश्चितरूपेण झारखंड विधानसभा ने विगत 20 वर्षों में राज्यहित में कई महत्वपूर्ण कार्य किया है तथा जनहित की समस्याओं के निदान एवं राज्य के विकास की दिशा में कई सफलताएं भी अर्जित की है. लेकिन उस गति को हम सभी दलगत भावना से ऊपर उठकर और तेज करने की आवष्यकता है.
उन्होंने कहा कि राज्य का सर्वोच्च प्रातिनिधि संस्था होने के नाते लोगों की इच्छा को मूर्त रूप प्रदान करना विधानसभा का महत्वपूर्ण दायित्व है. विधायकों के रूप में आपका यह मूल कर्तव्य है कि आप कार्यपालिका के कार्य-निष्पादन की निगरानी करें और लोगों की समस्याओं के प्रति सजग, सचेत तथा जवाबदेह रहें.
कार्यपालिका संविधान के अंतर्गत विधायिका के समक्ष किए गए कार्यों का आवश्यकतानुसार ब्यौरा प्रस्तुत करती है, लेकिन प्रश्न यह है कि ‘‘आप एक विधानसभा सदस्य के रूप में कितने प्रभावी तरीके से सभा अथवा समिति में सरकारी कार्यों की गहन जांच करने में समर्थ होते हैं.’’

राज्यपाल ने कहा कि जनता अपने क्षेत्र के प्रतिनिधि का चयन बहुत अपेक्षा, आशा और विश्वासस के साथ करती है. ये प्रतिनिधि उनकी समस्याओं के निराकरण तथा क्षेत्र के विकास के लिए उत्तदायी होते हैं. देश व राज्य के विकास की गति के लिए संसद एवं विधानमंडल को ही जिम्मेदार माना जाता है, इस बात का ध्यान हमेषा हमारे सभी विधायक और मंत्रिमंडल के सदस्य रखें.
सोशल साइट्स के वर्तमान व्यापक दौर में जनता यह देखती और चिंतन करती है कि अन्य राज्यों में जनता के लिए कौन-सी कल्याणकारी योजनायें संचालित हो रही हैं. इसके क्या प्रभाव हुए हैं और अच्छे परिणाम प्राप्त होने पर इसको अपने यहां भी अपनाने की अपेक्षा करती है. इसलिए हमारे विधायकों को भी इस मामले में सचेष्ट रहना चाहिये. उन्हें अपने यहां संचालित विभिन्न योजनाओं के साथ अन्य प्रदेषों में संचालित योजनाओं से अच्छी तरह अवगत रहना चाहिये.
उन्होंने कहा कि विधानमंडल को सदैव सचेष्ट रहना है कि जनहित हेतु आवश्यकताएं क्या है, उनकी समस्यायें क्या है, ताकि उसके अनुरूप नीतियां बनाई जा सकें. जन-प्रतिनिधियों को जनता की आवश्यकताओं को बेहतर तरीके से जानकर उन्हें मूलरूप प्रदान करने की दिशा में सक्रिय रहने की आवश्यकता है. उन्हें अपनी कार्यों में पारदर्शिता रखनी होगी तथा लोगों से अच्छी तरह पेश आयें.
राज्यपाल ने कहा कि किसी कार्य में कठिनाई में है तो जनता को उन जटिलताओं से अवगत करायें. जनता अपने जन-प्रतिनिधि को पूर्णतः ईमानदार समझें, ऐसा माहौल बनें. रामराज्य की स्थापना की दिश में जन-प्रतिनिधि, जनता और पदाधिकारी एवं कर्मी का ईमानदार होना आवश्यक है.

सदन के समक्ष कोई एक्ट व रोगुलेशन पारित करने हेतु लाया जाय, तो उसके प्रारूप को वे गंभीरतापूर्वक अध्ययन एवं उस पर मन्थन करें. इसके लागू होने से जनता पर पड़ने वाले प्रभाव का चिंतन करें, तभी आप जनता के प्रति अपने कर्तव्यों का बेहतर तरीके से निर्वहन कर पायेंगे.
सदन में बेहतर ढ़ंग से वाद-विवाद हो, सबकी बात सुनी जाये. सदस्य सदन के समक्ष जनहित में तथ्यपरक विषय लायें. सूचना तकनीक के इस युग में जनता अपने प्रतिनिधि का सदन में आचरण का आकलन करती है. हमारी जनता न केवल अपने क्षेत्र के विधायक द्वारा किये गये प्रश्नी को गंभीरतापूर्वक सुनती है, बल्कि सरकार का उस पर क्या विचार है, ये भी जानने को जिज्ञासु रहती है. इसे सदैव ध्यान में रखने की जरूरत है. इसलिए सदस्यों को बेहतर तरीके से प्रष्न करना चाहिये और सरकार को उचित जबाब देना चाहिये.
राज्यपाल ने कहा कि सरकार से यदि जनहित की कोई बात छूट जाये, तो विपक्ष को इस ओर प्रभावी रूप से ध्यान दिलाना चाहिये, लेकिन इस क्रम में सदन की गरिमा को ठेस नहीं पहुंचे, यह भी ध्यान रखना आवश्ययक है. विपक्ष विरोध करने के लिए विरोध न करें, अपनी रचनात्मक भूमिका निभायें. स्वयं के प्रति ईमानदार रहें.
वर्तमान में वैश्विक नोवेल कोरोना वायरस का दौर है. आप लोग कम से कम अपने-अपने विधानसभा क्षेत्र के लोगों को मास्क पहनने और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने हेतु आग्रह करें. आशा है कि शीघ्र ही वैक्सीन देश में आ जायेगी.
विधायक अपने विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न इलाके में जाकर जनता दरबार का आयोजन करें. इससे लोगों के सुख-दुःख को और बेहतर तरीके से जान सकेंगे. साथ ही विकास की संभावनायें भी सामने आयेंगी. आपको आपके विधानसभा का हर व्यक्ति पहचाने. आप अपनी छवि ऐसी बनायें कि जनता को आपमें अपनापन नजर आये और आपके समक्ष खुले मन से क्षेत्र की समस्याओं को प्रकट कर सकें.
राज्यपाल ने कहा कि झारखंड विधानसभा द्वारा अपने स्थापना दिवस के अवसर पर प्रत्येक वर्ष एक विधायक को उत्कृष्ट विधायी सम्मान से सम्मानित किया जाता है. इस वर्ष उत्कृष्ट विधायक का सम्मान ग्रहण करने वाले सदस्य नलिन सोरेन को हार्दिक बधाई देती हूं. उनसे कहना चाहूंगी कि उत्कृष्ट विधायक के रूप में चयनित होने पर उनसे जनता को अपेक्षायें और बढ़ जाती है, यह सदा ध्यान रखें. इस अवसर पर पुरस्कार ग्रहण करनेवाले विधानसभा के पदाधिकारियों एवं कर्मियों को उन्होंने बधाई दी.
राज्यपाल ने कहा कि झारखंड विधानसभा की गणना देश में आदर्श विधानसभा के रूप में हो. इसके लिए विधानसभा के प्रत्येक सदस्य को अपनी सक्रिय भूमिका की आवश्यकता है, ताकि हम अपने राज्य की जनता के दुःख-दर्द को दूर करके एक समृद्ध और गौरवशाली झारखंड का निर्माण कर सकें.
झारखंड विधान सभा के सभी विधायकों का आह्वान करते हुए कहा कि वे दलीय भावना से ऊपर उठकर ‘बहुजन हिताय बहुजन सुखाय’ की भावना से अभिसिंचित हो, ओत-प्रोत हो. चूंकि आम जनता जो अपनी आशाओं और आकांक्षाओं के लिए हमारे सदस्यों की ओर, हमारी विधायिका की ओर, हमारी कार्यपालिका की ओर टकटकी लगाये हुए है, उनकी आशा और विश्वास पूर्ण हो.

