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मोदी कैबिनेट ने NPR को दी हरी झंडी, जारी हुआ 8500 करोड़ रुपये का बजट

by bnnbharat.com
December 24, 2019
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मोदी कैबिनेट ने NPR को दी हरी झंडी, जारी हुआ 8500 करोड़ रुपये का बजट

मोदी कैबिनेट ने NPR को दी हरी झंडी, जारी हुआ 8500 करोड़ रुपये का बजट

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रांची: 6 महीने या उससे अधिक समय से स्थानीय क्षेत्र में रहने वाले किसी भी निवासी को राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (National Population Register) यानी NRP में अनिवार्य रूप से रजिस्ट्रेशन कराना होगा.

कोई विदेशी भी अगर देश के किसी हिस्से में छह महीने से रह रहा है, तो उसे भी NPR में अपनी डिटेल दर्ज करानी होगी.

राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) के तहत 1 अप्रैल, 2020 से 30 सितंबर, 2020 तक नागरिकों का डेटाबेस तैयार करने के लिए देशभर में घर-घर जाकर जनगणना की तैयारी है. देश के सामान्य निवासियों की व्यापक पहचान का डेटाबेस बनाना NPR का मुख्य लक्ष्य है. इस डेटा में जनसांख्यिकी के साथ बायोमीट्रिक जानकारी भी होगी.

NPR कैसे अलग है NRC से ?

NPR और NRC में अंतर है. NRC के पीछे जहां देश में अवैध नागरिकों की पहचान का मकसद छुपा है. वहीं, छह महीने या उससे अधिक समय से स्थानीय क्षेत्र में रहने वाले किसी भी निवासी को NRP में आवश्यक रूप से पंजीकरण करना होता है.

बाहरी की भी हाजिरी

बाहरी व्यक्ति भी अगर देश के किसी हिस्से में छह महीने से रह रहा है तो उसे भी NPR में दर्ज होना है. NPR के जरिए लोगों का बायोमीट्रिक डेटा तैयार कर सरकारी योजनाओं की पहुंच असली लाभार्थियों तक पहुंचाने का भी मकसद है.

जानें- क्या है पूरी प्रक्रिया और किन- किन चरणों में होगी

नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर में प्रत्येक नागरिकों की जानकारी रखी जाएगी. ये नागरिकता अधिनियम 1955 के प्रावधानों के तहत स्थानीय, उप-जिला, जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर तैयार किया जाता है. आपको बता दें, कोई भी निवासी जो 6 महीने या उससे अधिक समय से स्थानीय क्षेत्र में निवास कर रहा है तो उसे NPR में अनिवार्य रूप से पंजीकरण करना होता है.

कैसे होगा सर्वे

नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर में तीन प्रक्रिया होगी. पहले चरण यानी अगले साल एक अप्रैल 2020 लेकर से 30 सितंबर के बीच केंद्र और राज्य सरकार के कर्मचारी घर-घर जाकर आंकड़े जुटाएंगे. वहीं दूसरे चरण 9 फरवरी से 28 फरवरी 2021 के बीच पूरा होगा. तीसरे चरण में संशोधन की प्रक्रिया 1 मार्च से 5 मार्च के बीच होगी.

भारत सरकार ने अप्रैल 2010 से सितंबर 2010 के दौरान जनगणना 2011 के लिए घर-घर जाकर सूची तैयार करने तथा प्रत्येक घर की जनगणना के चरण में देश के सभी सामान्य निवासियों के संबंध में विशिष्ट सूचना जमा करके इस डेटाबेस को तैयार करने का कार्य शुरू किया था.

आजादी के बाद 1951 में पहली जनगणना हुई थी. 10 साल में होने वाली जनगणना अब तक 7 बार हो चुकी है. अभी 2011 में की गई जनगणना के आंकड़े उपलब्ध हैं और 2021 की जनगणना पर काम जारी है. बायोमेट्रिक डाटा में नागरिक का अंगूठे का निशान और अन्य जानकारी शामिल होगी.

क्या है उद्देश्य

नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर (एनपीआर) का उद्देश्य इस प्रकार है-

  • सरकारी योजनाओं के अन्तर्गत दिया जाने वाला लाभ सही व्यक्ति तक पहुंचे और व्यक्ति की पहचान की जा सके.
  • नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर (एनपीआर) के द्वारा देश की सुरक्षा में सुधार किया जा सके और आतंकवादी गतिविधियों को रोकने में सहायता प्राप्त हो सके.
  • देश के सभी नागरिकों को एक साथ जोड़ा जा सके.

मनमोहन सरकार ने की थी शुरुआत

यूपीए सरकार ने साल 2010 में NPR बनाने की पहल शुरू की थी. इसके बाद साल 2011 में हुई जनगणना के पहले इस पर काम शुरू किया गया था. बता दें कि साल 2021 में फिर देश की जनगणना होनी है, ऐसे में NPR पर एक बार फिर काम शुरू हो सकता है.

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