राज्यसभा में सांसद महेश पोद्दार के प्रश्न पर सरकार ने दी जानकारी
रांची: सबका साथ-सबका विकास की नीति पर काम करने वाली केंद्र की मोदी सरकार समाज के विभिन्न कमजोर वर्गों के साथ ही उभयलिंगी (ट्रांसजेंडर) व्यक्तियों के कल्याण के लिए भी प्रतिबद्ध है. भारत सरकार ने उभयलिंगी व्यक्तियों के हितों के संरक्षण के लिए “उभयलिंगी व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 पारित किया है.
इस एक्ट के तहत ‘ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए राष्ट्रीय परिषद’ का गठन भी किया गया है. राज्यसभा में सांसद महेश पोद्दार के एक अतारांकित प्रश्न का उत्तर देते हुए सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री रतन लाल कटारिया ने यह जानकारी दी.
मंत्री ने बताया कि उभयलिंगी व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 के अनुसार, परिषद में अन्य सदस्यों के साथ-साथ, राज्यों-संघ राज्य क्षेत्रों के बारी-बारी से उभयलिंगी समुदाय के पांच प्रतिनिधि और उभयलिंगी व्यक्तियों के कल्याण के लिए कार्यरत गैर-सरकारी संगठनों अथवा संघों का प्रतिनिधित्व करने वाले पांच विशेषज्ञ, जिन्हें केन्द्र सरकार द्वारा नामित किया जाएगा, परिषद विभिन्न नीतियों के प्रभाव का मूल्यांकन करने और तौर-तरीकों को निर्धारित करने के लिए स्वतंत्र होगी.
अधिनियम के खंड 18 में, उभयलिंगी व्यक्तियों के खिलाफ किए जाने वाले अपराधों तथा दंड को निर्धारित किया गया है. इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय उभयलिंगी व्यक्ति परिषद का एक कार्य उनकी शिकायतों का निवारण करना है. इस अधिनियम के उपबंध अतिरिक्त होंगे और वे इस समय लागू अन्य किसी कानून के एवज में नहीं होंगे.
अधिनियम के खंड-19 के अनुसार, केन्द्र सरकार, समय-समय पर, राष्ट्रीय परिषद को इस अधिनियम के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए धनराशि उपलब्ध करायेगी.

