चतरा: किसी राष्ट्र की अच्छी और सफल सरकार वही समझी जाती है, जो अपने राष्ट्र की रक्षा, लोक कल्याण और उपकार को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आगे बढ़ते चलती रहती है. हम आंखें बंद कर के भी देखें तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में गठित भाजपानीत एन.डी.ए. की सरकार इस कसौटी पर शत प्रतिशत सफल नजर आती है.
हालांकि मोदी के नेतृत्व में गठित इस सरकार का पहला कार्यकाल का सर्वाधिक समय में देश में जड़ जमा चुकी कुचक्री व्यवस्थाओं और भ्रष्टाचार को उखाड़ फेंकने में गुजर गया. इसके बावजूद गरीबों के जीवन में एक नया रंग भरने के लिए अंत्योदय को सुदृढ़ करने का जो सार्थक प्रयास किया गया वह अभूतपूर्व है. इस कार्यकाल में गरीबों के उत्थान के लिए केंद्र सरकार ने जो कार्यक्रम चलाया, उससे दुनिया में भारत का गौरव बढ़ा. इन कार्यक्रमों में गरीबों का बैंक खाता खोला जाना, उन्हें मुफ्त गैस कनेक्शन, मुफ्त बिजली, आवास और शौचालय की सुविधा देना शामिल है.
इस कार्यकाल के अन्य उल्लेखनीय कार्यों में सर्जिकल स्ट्राइक एवं एयर स्ट्राइक को याद की जाती है. वहीं वन रैंक वन पेंशन, वन नेशन, वन टैक्स (जी.एस.टी.) और किसानों के लिए बहुप्रतिक्षित एम.एस.पी. शामिल है.
मोदी सरकार की प्रथम कार्यकाल के पांच वर्ष और दूसरे कार्यकाल के एक वर्ष की उपलब्धियों को जोड़ दिया जाय तो इस छह साल का इतिहास भारतीय इतिहास का एक सुनहरा दस्तावेज कहलायेगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शब्दों में गत एक वर्ष में देश ने सतत नये स्वप्न देखे, नये संकल्प लिए और इन संकल्पों को सिद्ध करने के लिए कदम भी बढ़ायें गये. भारत की इस ऐतिहासिक यात्रा में देश के हर समाज, हर वर्ग और हर व्यक्ति वखूबी अपना दायित्व निभाया.
प्रधानमंत्री के नये सपनों की सिद्धि के रूप में मोदी सरकार के 2.0 के सता में आते ही जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 के प्रावधानों को निरस्त कर देश की एकता और अखंडता को मजबूत किया गया. ट्रिपल तलाक का अभिशाप झेल रही मुस्लिम महिलाओं को मुक्ति दिलानेे के लिए कानून बनाया गया. समग्र राष्ट्र का अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण का सपना पूरा हुआ. आतंकवाद पर यू.ए.पी.ए. और एस.पी.जी. के जरिए नकेल कसी गयी. पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बंग्लादेश से प्रताडि़त भारत में रह रहे हिन्दू, बौद्ध, सिख, जैन और पारसी शरणार्थियों को भारत में नागरिकता देने के लिए नागरिकता संशोधन कानून (सी.ए.ए.) संसद में पारित किया गया.
मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के पहले वर्ष में ही सेनाओं में समन्वय बढ़ाने के लिए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सी.डी.एस.) के गठन का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया. इस कार्यकाल में भारत ने वैश्विक मंदी से उबरने के लिए अर्थव्यवस्था को गति देने के उद्देश्य से दस सरकारी बैंकों का विलय जैसे आर्थिक सुधार के कार्यक्रम को अमल में लाया गया. आर्थिक सुधारों की शृंखला में नागरिक उड्डयन में एफ.डी.आई. का रास्ता प्रशस्त करना, कॉरपोरेट टैक्स को कम करना, एन.बी.एफ.सी. लोन पर मोरोटोरियम, कंपनी एक्ट में सुधार और सुक्ष्म, लघु, मध्यम उद्योगों (एम.एस.एम.ई.) के लिए आसान ऋण की व्यवस्था करना शामिल है.
इसी कार्यकाल में वैश्विक महामारी कोरोना ने भारत को अपनी चपेट में लेेने की कोशिश की, लेकिन जब इस महामारी ने विश्व की महाशक्ति देशों की हालत पतली कर दी तब भी भारत ने काफी हद तक हालात काबू में रखा. भारत जैसे विशाल देश में एक कोरोना संकट से लडऩे के लिए लगातार 70 दिन तक लॉकडाउन का पालन होना अपने आप में एक उपलब्धि है. प्रधानमंत्री के एक आह्वान पर पूरा देश उनके पीछे खड़ा नजर आया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए लागू किए गए लॉकडाउन से प्रभावित लोगों, अर्थव्यवस्था, रोजगार, कृषि एवं उद्योगों के 2020 में 20 लाख करोड़ रुपये से अधिक के विशेष पैकेज की घोषणा करके आत्म निर्भर भारत के अभ्युदय भारत का सूरज उगाया है. यह पैकेज देश की कुल जी.डी.पी. का लगभग 10 प्रतिशत है.
आत्मनिर्भर भारत पैकेज के तहत देश की 80 करोड़ जनता को मोदी सरकार ने फूड सिक्योरिटी योजना से पांच माह का मुफ्त राशन उपलब्ध कराया है. महिला जनधन खाताधारकों को खाता में पांच सौ रुपये के हिसाब से प्रत्येक को पंद्रह सौ रुपये, किसानों के खाते में दो हजार की राशि, सम्मान निधि अग्रिम किस्त के रूप में ट्रांसफर की जा चुकी है. इसी प्रकार देश के आठ करोड़ घरों में तीन गैस सिलिंडर केंद्र सरकार द्वारा मुफ्त दिया जा रहा है. दिव्यांगों और बुजुर्गों के खाता में एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी गयी है. इसके अतिरिक्त लगभग 50 हजार रेहड़ी-पटरी वाले लोगों को दस-दस हजार की आर्थिक सहायता देने की योजना शुरू की जा रही है.
कोरोना संकट के दौर में पटरी से उतरी अर्थव्यवस्था को सुचारू करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वदेशी और स्वावलंबन का नारा देते हुए देश की आत्मा को जगाया है. साथ ही लोकल के लिए वोकल कह कर स्थानीय उपक्रमों को बढ़ावा देने पर जोर दिया है. मोदी सरकार ग्राम्य आधारित अर्थव्यवस्था, कृषि क्षेत्र तथा लघु कुटीर उद्योगों को अवसर के रूप में तलाशने की जरूरत महसूस करती हैं.
दूसरी ओर मोदी सरकार ने एम.एस.एम.ई. के सात सौ से अधिक ईकाइयों को साढ़े तीन लाख करोड़ के राहत पैकेज की घोषणा की है.
केंद्र किसानों और श्रमिकों के सामाजिक उत्थान के लिए जिन योजनाओं को सर्वाधिक महत्व दे रही है. उनमें प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना, प्रधानमंत्री किसान पेंशन योजना, प्रधानमंत्री लघु व्यावसायिक मनधन योजना, जलशक्ति मंत्रालय और हर घर जल योजना, एक देश एक राशन कार्ड एवं मनरेगा आदि शामिल है.
कुल मिलाकर भारत एक ऐसे राष्ट्र निर्माण की ओर अग्रसर है, जिसमें सभी के लिए शिक्षा, रोजगार, चिकित्सा और उन्नति के समान और सही अवसर उपलब्ध है.

