रांची: केंद्र सरकार की मजदूर विरोधी, राष्ट्र विरोधी और जन विरोधी नीतियों के खिलाफ आज आहूत देशव्यापी हड़ताल का असर झारखंड में भी दिखा. यहां बैंक, डाकघर, कोयला, बीमा, सहित कई अन्य सेक्टर में कामकाज प्रभावित हुआ. कई साइडिंग से कोयला का रेक नहीं जा सका. कई सरकारी बैंकों के शटर नहीं उठे.
हड़ताल से 500 करोड़ से अधिक का कारोबार प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है. बैंक कर्मियों के हड़ताल में शामिल होने के कारण चेक क्लियरेंस में दिक्कत हुई. ऑनलाइन ट्रांजेक्शन्स जैसे एनईएफटी, आईएमपीएस पर कोई असर नहीं पड़ा. वहीं प्राइवेट बैंकों पर इसका असर नहीं हुआ.
हड़ताल की वजह
सीटू के राज्य महासचिव प्रकाश विप्लव, एटक के महासचिव पीके गांगुली और एक्टू के महासचिव शुभेंदू सेन ने कहा कि श्रम कानूनों में मालिक पक्षीय बदलाव का विरोध मजदूर संगठन कर रहे हैं.
केंद्र सरकार द्वारा सार्वजनिक क्षेत्रों को बेचे जाने की खिलाफत हो रही है. ट्रेड यूनियन असंगठित क्षेत्र के सभी कामगारों को कम से कम 21 हजार रुपये न्यूनतम वेतन देने की मांग कर रहे हैं. सरकार से नयी पेंशन नीति वापस लेने, बीमा, बैंक, कोयला आदि क्षेत्रों में श्रमिक संगठनों पर हो रहे हमले पर रोक लगाने की मांग की गई.
बैंकों का हो रहा निजीकरण
झारखंड बैंक फेडरेशन के उप महासचिव एसके पांडे ने कहा कि सरकार धीरे धीरे बैंकों का विलय कर रही है. इसका उद्देश्य बैंको का निजीकरण करना है. सरकार बैंकों का विलय करने के बहाने उसके निजीकरण करने पर काम कर रही है.
देश के मुट्ठी भर पूंजीपतियों के पास लगभग 10 लाख करोड़ रुपये बकाया है. यूनियन की मांग है कि सरकार द्वारा उनके नाम को सार्वजनिक किया जाए. एनपीए की वसूली नहीं हो रही है. इसे घाटा दिखाकर बैंकों का विलय किया जा रहा है.
इन संगठनों ने बुलाया बंद
10 केंद्रीय व्यापारिक संगठन जैसे इंटक, एटक, एचएमएस, सीटू, एटक, टीयूसीसी, एआईसीसीटीयू, एलपीएफ, यूटीयूसी के अलावा ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन बेफी इनबॉक सहित बैंक कर्मचारी, सेना महासंघ, राज्य सरकार के कर्मचारी संगठन इस बंद में शामिल हुए.
जगह-जगह प्रदर्शन
बंदी को लेकर झारखंड की राजधानी रांची सहित राज्य भर में जगह-जगह धरना प्रदर्शन किये गये. ट्रांसपोर्ट सेवा भी प्रभावित हुई. इससे आवागमन करने वालों को परेशानी का सामना करना पड़ा.
मोबाइल दुकानें बंद
देश भर के तमाम मोबाइल दुकानें आज बंद थी. रांची में भी इसका असर देखा गया. दुकानदारों का कहना है कि ऑनलाइन बाजार के कारण गली, मुहल्लों के मोबाइल दुकानदारों की दुकानदारी चौपट हो गई है. इसके विरोध में मोबाइल दुकानदारों ने दुकानें बंद रखी.

