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“मां बस तू साथ रहना”
कभी तुमसे नहीं कहा,
आज चाहती हूं,
दिल की बात कहना।
मेरी प्यारी मां, जैसे बचपन में,
संभाला करती थी तुम मुझे,
बस वैसे ही,
आगे भी संभाल लेना।
भले पूरी दुनिया,
छोड़ दें मुझे अकेला,
बस तुम साथ देना।
तुम्हें तो पता है,
मैं पागल सी,
जिद्दी सी गुड़िया हूं तेरी।
कभी मुझे समझती,
तो कभी समझाती रहना।
चाहे पूरी दुनिया से,
अलगाव हो मेरा,
बस तुम हमेशा,
मेरे साथ रहना।

अंकिता जैन ‘ अवनी’
(लेखिका/ कवयित्री)
मप्र
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