नई दिल्ली: बिहार के चर्चित मुजफ्फरपुर आश्रयगृह कांड में एनजीओ संचालक व पूर्व विधायक ब्रजेश ठाकुर सहित 19 लोगों को छात्राओं के यौन उत्पीड़न और शारीरिक उत्पीड़न का साकेत कोर्ट ने दोषी करार दिया है. दोषियों में और बिहार सरकार की पूर्व मंत्री मंजू वर्मा सहित आठ महिलाएं हैं. इनकी सजा पर 28 जनवरी को सुनवाई होगी. वहीं, एक आरोपी मोहम्मद साहिल उर्फ विक्की को सुबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया.
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ कुलश्रेष्ठ ने सोमवार को 1045 पेज का फैसला सुनाया. इसमें ठाकुर सहित अन्य को पॉक्सो कानून के तहत गंभीर यौन उत्पीड़न और सामूहिक दुष्कर्म का दोषी ठहराया गया. कोर्ट के दोषी ठहराते ही एक आरोपी रवि वहीं फूट-फूट कर रोने लगा.
दोषियों में आश्रयगृह के कर्मचारी और समाज कल्याण विभाग के अधिकारी भी शामिल हैं. अभियुक्तों के खिलाफ 30 मार्च, 2019 को आरोप तय हुए थे. कोर्ट ने इस मामले में बीते साल 30 सितंबर को सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया था.
इन अपराधों के दोषी
दुष्कर्म, यौन उत्पीड़न, नाबालिगों को नशीली दवाएं देना, आपराधिक षडयंत्र, बच्चों का उत्पीड़न सहित अन्य. समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों पर आपराधिक षड्यंत्र रचने, ड्यूटी में लापरवाही और लड़कियों के उत्पीड़न की जानकारी न देना.
इनको ठहराया दोषी
आश्रयगृह संचालक ठाकुर, अधीक्षक इंदु कुमारी, आश्रयगृह कर्मचारी मीनू देवी, चंदा देवी, नेहा कुमारी, किरण कुमारी, विजय तिवारी, गुड्डू कुमार, कृष्णा राम, रामानुज ठाकुर, हेमा मसीह, पूर्व मंत्री मंजू वर्मा, निलंबित सीपीओ रवि रोशन, बाल कल्याण समिति के सदस्य विकास कुमार, तत्कालीन सहायक निदेशक रोजी रानी, ब्रजेश की करीबी साजिस्ता परवीन उर्फ मधु, बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष दिलीप वर्मा, रमाशंकर सिंह और अश्विनी कुमार.

