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नया विधानसभा के इंवायरमेंटल डैमेज की 5.26 करोड़ बैंक गारंटी भी भवन निर्माण को होगी वापस

by bnnbharat.com
September 26, 2019
in Uncategorized
15 सितंबर के बाद होगा झारखंड विधानसभा के नये भवन का उदघाटन, अब तक हो चुके हैं 405 करोड़ रुपये खर्च
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Prem Anand

रांचीः विधानसभा के नये भवन को पर्यावरण क्लीरेंस तो मिल ही चुका है. जल्द ही इसके रिमिडिएशन प्लान (इंवारमेंटल डैमेज प्लान) को भी स्वीकृति मिल जाएगी. इसके साथ ही झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पास जमा इंवायरमेंटल डैमेज की बैंक गारंटी 5.26 करोड़ को भी भवन निर्माण विभाग को वापस कर दिया जाएगा. सूत्रों के अनुसार इसके लिए कमेटी भी बना दी गई है.

अब जानिए इंवायरमेंटल क्लीयरेंस की क्या है प्रक्रिया

भवन निर्माण से पहले प्रायर इंवायरमेंटल क्लीयरेंस लिया जाता है. विधानसभा भवन के मामले में निर्माण से पहले इंवायरमेंटल क्लीयरेंस नहीं लिया गया था. इसके बाद भारत सरकार ने छह महीने का विंडो पीरियड दिया था. इस बीच में इंवायरमेंटल क्लीयरेंस के लिए अप्लाई करना था. यह आदेश भारत सरकार ने सभी राज्यों में हो रहे भवन निर्माण के लिए दिया था. इसी बीच झारखंड सरकार ने हाईकोर्ट और विधानसभा के इंवायरमेंटल क्लीयेंस के लिए अप्लाई कर दिया. इसी बीच सिया(State Level Environment Impact Assessment Authority) का भी गठन हो गया. यह सारी प्रक्रिया 2017 में ही पूरी कर ली गई थी.

जानिए फिर क्या निर्णय लिया गया

इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद निर्णय लिया गया कि बी कटेगरी के जितने भी प्रोजेक्ट हैं, उसका इंवायरमेंटल क्लीयरेंस सिया (State Level Environment Impact Assessment Authority) के रेकोमेंडेशन पर होगा. उसके लिए टॉर( टर्म ऑफ रेफरेंस) दिया जाएगा. इसके तहत जो इंवायरमेंटर डैमेज हुआ है, उस डैमेज को फिर से सुधार के लिए प्रोजेक्ट बनाना होगा. इसके बाद ईआइए, ईएमपी और रिमेडेशियन प्लान बनाकर सिया को देना होगा. सिया इसे एसेस कर रिकोमेंड करेगी. इस टॉर( टर्म ऑफ रेफरेंस ) के लिए तीन साल का समय दिया गया है. नियमतः तीन साल के अंदर रिर्पोट बनाकर देना पड़ता है.

फिर आगे ऐसी होगी प्रक्रिया

इसके बाद सिया झारखंड राज्य प्रदूषण बोर्ड को एक पत्र भेजेगा. इस खत का मजमून यह होगा कि रिमिडियेशन प्लान के तहत जितना डैनेज हुआ है, उसकी राशि बैंक गारंटी के रूप में झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पास जमा रहेगी. यह बैंक गारंटी तब तक जमा रहेगी. जब तक रिमिडिशयन प्लान को इंप्लीमेंट नहीं किया जाए.

बनाई गई है एक कमेटी

इसके लिए दो सदस्यीय कमेटी बनाई गई है. इसमें एमओईएफ रिजनल ऑफिस के एक प्रतिनिधि और सिया के एक प्रतिनिधि शामिल हैं. कमेटी को रिर्पोट देने के लिए 56 दिन का समय दिया गया है.

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