जबलपुर: लॉकडाऊन की अवधि में नर्मदा का जल स्वच्छ हुआ है और पानी की गुणवत्ता बेहतर हुई है. यह तथ्य फाऊंडेशन फॉर इकोलॉजिकल सिक्योरिटी के जन विज्ञान केन्द्र द्वारा किए गए नर्मदा के पानी के परीक्षण में सामने आया. संस्था द्वारा नर्मदा के पानी में पीएच मान, टीव्हीएस एवं पानी में उपस्थित ऑक्सीजन आदि का परीक्षण किया गया.
इस संबंध में ज्ञान विज्ञान केन्द्र मंडला द्वारा दी गई जानकारी अनुसार लॉक-डाउन से पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल रहे हैं. लॉक-डाउन के बाद आबोहवा साफ हो गई है, जीवनदायिनी नदियों को नया जीवन मिल रहा है. आमजन-जीवन की गतिविधियां कम होने से केमिकल युक्त गंदा पानी, कचरा आदि नदियों में गिरना बंद हो गया है साथ ही ठोस कचरा भी कम हुआ है. इससे नदी में मछलियों की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है और पानी की गुणवत्ता में भी बदलाव आया है.
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संस्था द्वारा मंडला नगर के रपटा घाट, हनुमान घाट एवं संगम घाट से पानी का नमूना लेकर परीक्षण किया गया. यहां नदियों के किनारे सब्जियों की खेती में रासायनिक खादों का इस्तेमाल होना कम हुआ है. साथ ही घाटों पर डिटर्जेंट, साबुन, सोडा और कूड़ा कचरा एकत्र न होने से नर्मदा नदी के रपटा घाट, हनुमान घाट और संगम घाट पर पानी की गुणवत्ता में सकारात्मक असर पड़ा है. (पीएच मान एवं टीडीएस रूप से) इन घाटों के पानी की गुणवत्ता का पता लगाने के लिए फाउंडेशन फॉर इकोलॉजिकल सिक्योरिटी के जनविज्ञानकेंद्र, मण्डला द्वारा पानी का परीक्षण किया गया, जिसमें पीएचमान, टीडीएस, पानी में उपस्थित ऑक्सीजन की मात्रा आदि का परीक्षण किया गया.
उक्त परीक्षण से यह बात सामने आई कि इन घाटों के पानी में पीएच मान सामान्य स्तर पर यानी 6.5 से 8.5 के मध्य है तथा टीडीएस भी 180 से 200 के बीच में है साथ ही पानी में घुलनशील ऑक्सीजन की मात्रा भी सामान्य स्तर पर 5.0 से 10.0 के मध्य है जो कि पानी में रहने वाले जीवों के लिए सर्वथा उपयुक्त है. लॉकडाउन की वजह से इन घाटों के पानी में सकारात्मक प्रभाव पड़ा है उसमें प्रदूषण में कमी आई है. जांच में यह पाया गया कि इन घाटों के पानी में वैसी ही गुणवत्ता है जैसी पीने के पानी की गुणवत्ता होनी चाहिए.

