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33 सैनिकों की मौत के बाद सीरिया में नाटो-रूस के बीच जंग जैसे हालात

by bnnbharat.com
February 29, 2020
in समाचार
33 सैनिकों की मौत के बाद सीरिया में नाटो-रूस के बीच जंग जैसे हालात
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अंकाराः सीरिया में तुर्की के 33 सैनिकों के हवाई हमले में मारे जाने के बाद तुर्की के राष्‍ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन ने धमकी दी है कि सीरिया सरकार को तुर्की के सैनिकों की हत्या की ‘कीमत चुकानी’ होगी.बता दें कि  नाटो और उसके धुर विरोधी देश रूस के बीच जंग जैसे हालात बनते जा रहे हैं. नाटो देशों ने अपने सहयोगी तुर्की के सैनिकों की हत्‍या को गंभीरता से लिया है और अब वे अंकारा के साथ कंधे से कंधा मिलाते दिख रहे हैं. नाटो अब तुर्की के एयर डिफेंस‍ सिस्‍टम को मजबूत करने जा रहा है.

इससे पहले तुर्की ने अपने सैनिकों के मारे जाने के बाद नाटो देशों से अनुरोध किया था कि वे नो फ्लाई जोन स्‍थापित करें लेकिन बताया जा रहा है कि नाटो देशों ने ऐसा करने से मना कर दिया. नाटो देशों को डर सता रहा है कि अगर उन्‍होंने नो फ्लाई जोन स्‍थापित किया गया तो इससे सीधे उनका संघर्ष रूसी एयरफोर्स से होगा.

नाटो के महासचिव जेन्‍स स्‍टोल्‍टेनबर्ग ने कहा कि इस हमले के बाद पश्चिमी देशों के इस सैन्‍य गठबंधन ने तुर्की के साथ अपनी ‘पूरी एकजुटता’ दिखाई है. हालांकि स्‍टोल्‍टेनबर्ग ने तत्‍काल तुर्की को कोई सैन्‍य सहायता देने की संभावना से इनकार कर दिया.

सूत्रों के मुताबिक नाटो सीरिया में हवाई निगरानी बढ़ाने और स्‍पेन की ओर से संचालित अमेरिकी पेट्रिआट एयर डिफेंस सिस्‍टम को बनाने पर विचार कर रहा है. इससे पहले अमेरिका ने कहा था कि वह केवल तभी पेट्रिआट मिसाइल डिफेंस सिस्‍टम तुर्की को देगा जब वह रूस के एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्‍टम से खुद को पूरी तरह से अलग कर लेगा.

बता दें कि रूस के साथ जंग के मुहाने पर खड़ा तुर्की रूस से मिसाइल डिफेंस सिस्‍टम एस-400 खरीद रहा है. इस डील के लिए तुर्की ने अमेरिका के साथ अपनी दोस्‍ती को भी ताक पर रख दिया था. इसके बाद अमेरिका ने अपने एफ-35 फाइटर जेट की बिक्री को रोक दिया था. इससे पहले नाटो देशों ने शुक्रवार को एक आपात बैठक की. आर्टिकल 4 के तहत यह बैठक तभी आयोजित की जाती है जब उसकी सुरक्षा को गंभीर खतरा उत्‍पन्‍न हो जाता है.

तुर्की के अधिकारियों ने आरोप लगाया है कि रूस समर्थित बशर अल असद की सीरिया सरकार ने उसके सैनिकों पर इदलिब प्रांत में भीषण हवाई हमला किया है. इस हमले में तुर्की के 33 सैनिक मारे गए हैं जबकि तुर्की ने जवाबी कार्रवाई में सीरिया के 309 सैनिकों को मारने का दावा किया है.

बताया जा रहा है कि तुर्की के जवाबी हमले में सीरिया के मात्र 20 सैनिक मारे गए हैं. इस बीच कई सूत्रों ने दावा किया है कि रात में हुए इस हमले को रूस की वायुसेना ने अंजाम दिया था. रूस के सहयोग से ही सीरिया पिछले 3 महीने से इदलिब में भीषण अभियान चला रखा है.

इस बीच तुर्की के राष्‍ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन ने धमकी दी है कि सीरिया की बशर अल असद सरकार को तुर्की के सैनिकों की हत्या की ‘कीमत चुकानी’ होगी. बढ़ते विवाद के बीच तुर्की ने तनाव कम करने के लिए इस हमले का आरोप असद पर लगाया है और मॉस्को से तनाव कम करने के लिए बातचीत शुरू कर दी है.

बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोंपियो ने इस हमले को ‘कायरतापूर्ण और घृणा से भरा’ करार दिया है. उन्‍होंने कहा कि हम असद सरकार और रूस की क्रूरता के खिलाफ तुर्की की मदद के विकल्‍पों पर विचार कर रहे हैं.

सीरिया के इदलिब प्रांत में मौजूद लड़ाकों को तुर्की का समर्थन हासिल है और असद के लिए यही सिरदर्द का कारण है. असद को पूरे सीरिया पर नियंत्रण के लिए इस इलाके पर कब्जा करना जरूरी है, लेकिन तुर्की के कारण ऐसा नहीं हो पा रहा है.

गुरुवार को तुर्की के समर्थन वाले लड़ाकों ने फिर से हमला किया था. तनाव बढ़ते देख रूस ने कहा है कि उसके दो जंगी जहाज इस्तांबुल के नजदीक है. इस बीच, संयुक्त राष्ट्र में रूस के दूस वेस्ली नेबिजिया ने सुरक्षा परिषद को बताया कि वह इदलिब में तनाव कम करने के लिए तैयार है, बशर्ते कोई इसकी पहल करे

सीरिया के हमले तिलमिलाए तुर्की ने यूरोपीय देशों को भी धमकी दे दी है। तुर्की ने कहा है कि वह यूरोप में प्रवासियों की बाढ़ ला देगा. बता दें कि सीरिया युद्ध के दौरान लाखों प्रवासी तुर्की और आसपास के यूरोपीय देशों में आ गए थे. तुर्की में करीब 40 लाख सीरियाई शरणार्थी हैं.

हालांकि शरणार्थियों की संख्या बढ़ने के कारण तुर्की में इसे लेकर बवाल भी हो रहा है. ऐसे में यूरोप पर दबाव बनाने के उद्देश्य से तुर्की ने धमकी दी है कि अगर यूरोपीय यूनियन अपने समझौते पर कायम नहीं रहता है तो वह शरणार्थियों को यूरोप जाने के लिए अपना रास्ता खोल देगा.

इस बीच, यूरोपीय यूनियन ने तुर्की से कहा है कि वह 2016 में किए गए शरणार्थी समझौते पर कायम रहे. इस समझौते के तहत यूरोपीय देशों ने तुर्की को 6 अरब यूरो दिया था, ताकि शरणार्थी यूरोपीय देशों में न आने पाए.

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