रवि सिंह,
ज्योतिषाचार्य पंडित आलोक मिश्रा द्वारा शारदीय नवरात्र पर विशेष
BNN DESK: इस वर्ष शारदीय नवरात्र की शुरुआत 17 अक्टूबर 2020 से होने वाली है. मासिन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होने वाले नवरात्रों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की होने वाली होती है. नवरात्रि का हर दिन मां दुर्गा के 9 अलग-अलग स्वरूपों को समर्पित होता है ज्योतिषाचार्य पंडित आलोक मिश्रा के अनुसार इस बार नवरात्रि में 58 साल बाद एक बहुत ही शुभ संयोग बनने जा रहा है. नवरात्रि पूजन से लेकर घटसापना तक की जानकारी दी.
17 अक्टूबर से शारदीय नवरात्र आरंभ होने वाली है, घर-घर मां दुर्गा की चौकी सजाई जाएगी 25 अक्टूबर तक मां का पूजन अर्चन और व्रत किए जाएंगे,
इस बार शारदीय नवरात्र का विशेष महत्व बढ़ जाता है, क्योंकि यह 58 वर्षों बाद ऐसी नवरात्रि आ रही है की शनि मकर राशि में गुरु धनु राशि में होगा, इससे पहले यह संयोग 1962 में बना था, इस बार मां घोड़े की सवारी पर आ रही है.

यह 9 दिन मां भगवती को बेहद प्रिय है इस समय मां अपने भक्तों की सभी मुराद पूरी करती है नवरात्रे के दिन बेहद शुभ माने जाते हैं. इस नवरात्र में मां को प्रसन्न करने के लिए और अपनी सभी मनोकामना पूर्ण करने के लिए मां के भक्तों कुछ उपाय करके अपनी सारी मनोकामना पूर्ण करते हैं ,
इस बार शारदी नवरात्र 17 अक्टूबर 2020 से प्रारंभ होकर 25 अक्टूबर 2020 तक रहेगा, नवरात्र के प्रथम दिन मां शैलपुत्री की पूजा एवं कलश की स्थापना, द्वितीय दिन मां ब्रह्मचारिणी की, तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की, चौथे दिन मां कुष्मांडा की ,पांचवें दिन मां स्कंदमाता की ,छठे दिन मां कात्यायनी की ,सातवें दिन मां कालरात्रि की, आठवें दिन महागौरी की ,और नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है.
जो भक्तगण 9 दिन मां का व्रत रखते हैं वह 26 अक्टूबर को पारण करेंगे, 26 अक्टूबर को दुर्गा विसर्जन और विजयादशमी दशहरा मनाया जाएगा. ज्योतिषाचार्य पंडित आलोक मिश्रा ने बताया की 17 अक्टूबर को कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6:27 से लेकर 10:13 तक होगा वह 11:44 सुबह से लेकर 12:29 दोपहर तक होगा.

विशेष पूजा में क्या करें
नवरात्र में 9 दिन प्रसाद का भोग
लगाने का विशेष महत्व है जैसा की प्रथम दिन शुद्ध घी का भोग लगाना चाहिए ,दूसरे दिन शक्कर का भोग लगाना चाहिए ,तीसरे दिन दूध खीर से बने वस्तुओं का भोग लगाना चाहिए, चौथे दिन मालपुआ का भोग लगाना, चाहिए, पांचवे दिन केले ,का छठे दिन शहद का, सातवें दिन गुड़ का ,आठवें दिन नारियल का, और नौवें दिन तिल का भोग लगाने से भक्तों की सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती है, दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से सारी चिंताओं से मुक्ति मिलती है ,कोर्ट कचहरी से मुक्ति मिलती है, शत्रु पर विजय प्राप्त होती है, मां की असीम अनुकंपा प्राप्त होती है, संतान प्राप्ति की मनोकामना पूर्ण होती है, रोग शोक दूर होता है ,व्यापार में तरक्की, सम्मान ,मान प्रतिष्ठा, बढ़ती है तथा भक्त मां की कृपा का पात्र होता है, इसलिए नवरात्र में दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से विशेष लाभ मिलता है नवरात्र के मंगलवार को पान का एक साबुत पत्ता लोंग इलायची रखकर हनुमान मंदिर में जाकर अर्पित करते तो कर्जा से अतिशीघ्र मुक्ति मिलती है.

यदि नवरात्र के दिनों में मां दुर्गा को पान के पत्ते पर गुलाब का फूल रखकर चढ़ाने से सुख समृद्धि एवं धन का आगमन होने लगता है.
नवरात्र के दिनों में पान के पत्ते पर केसर रखें उसके बाद मां के समक्ष दुर्गा स्त्रोत का पाठ करें तो सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव होने लगता है और घर की सारी परेशानी और गृह क्लेश दूर हो जाती है.

यदि किसी को नौकरी में या व्यापार में बाधा आ रही हो या कार्य नहीं हो रहा हो तो नवरात्र के दिनों में मां को पान के पत्ते पर सरसों का तेल लगाकर मां को अर्पित किया जाए और इस पत्ते को रात में अपने सिरहाने रख कर सोया जाए और अगले सुबह दुर्गा मंदिर के पीछे रख दिया जाए तो नौकरी एवं व्यापार में तरक्की होगी और कार्य में आने वाली सारी बाधाएं दूर होती हैं.
बह्म मुहूर्त में सुबह 4:00 बजे से लेकर 6:00 बजे के बीच यदि कोई भक्त मां की आराधना करता है पूजा पाठ करता है तो उसे कई गुना पुण्य फलों की प्राप्ति होती है.
यदि कोई अष्टमी तिथि को शिव मंदिर जाकर शिवलिंग पर दूध, दही, घी ,शहद ,शक्कर ,बेलपत्र ,चढ़ाता है तो उसकी सारी मनोकामना पूर्ण होती है एवं जीवन की समस्त बाधाएं दूर होती है.

मां को सूखे मेवे का भोग ,लाल चुनरी, लाल चूड़ी, सिंदूर और सिंगार का सामान बेहद पसंद है. अतः नवरात्र के दिनों में यह सारी वस्तुएं चढ़ाने से मां बहुत प्रसन्न होती हैं.

मां को पान का पत्ता, लोंग सुपारी ,इलायची, मिश्री ,नारियल, चढ़ाने से एवं देसी घी का दीपक जलाने से सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.
नवरात्र में कन्याओं का पूजन का विशेष महत्व है मां की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए छोटी-छोटी कन्याओं का बुलाकर उनका पूजन करना चाहिए उन को भोजन कराना चाहिए तथा कुछ वस्तुएं उपहार में देनी चाहिए मीठी चीजें देने से मां बहुत प्रसन्न होती हैं और भक्तजनों की सारी मनोकामनाएं पूर्ण करती है.


