नई दिल्ली: भारत और चीन के बीच हुए खूनी संघर्ष का साफ-साफ असर दिखने लगा है. इस संघर्ष से दोनों देशों के रिश्तों में खटास आना तय है. इसका पहला असर भारत,चीन और रुस के विदेश मंत्रियों के बीच होने वाले प्रस्तावित बैठक पर पड़ी है. सूत्रों के मुताबिक 23 जून को तीनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच बैठक को अब अनिश्चित काल के लिये टाल दिया गया है.
दरअसल, पूर्वी लद्दाख के गलवान घाटी में भारत और चीन की सेना के बीच ताजा विवाद अचानक से गहरा गया. जिसमें अचानक से चीनी सेना ने भारत के सेना पर हलमका कर दिया. चीन की सेना ने भारतीय सेना पर पत्थर,रॉड और लाठियों से हमला बोल दिया. जबकि उस समय भारतीय सेना निहत्थे थे. इस झड़प में 23 भारतीय सेना के शहीद हुए है. जबकि चीन के 40 सेना के मारे जाने की खबरें भी आई है. जिसकी पुष्टि अभी नहीं हुई है.
उधर इस खराब रिश्तों के बाद माना जा रहा है कि भारत में चीनी निवेश को गहरा धक्का लग सकता है. इसके लिये सबसे बड़ी चोट देने की केंद्र सरकार ने तैयारी भी कर ली है. दिल्ली-मेरठ रेल परियोजना को रद्ध करने की चर्चा तेज हो गई है.
वहीं देश में आमजनों में भी चीनी सामानों को लेकर बहिष्कार करने की मांग उठ रही है. हालांकि चीन इसके बाद भी गलवान घाटी को अपने क्षेत्र में बताकर क्षेत्र में तनाव पैदा कर दिया है. वहीं पीएम नरेंद्र मोदी ने साफ-साफ कहा कि भारत के जवानों का शहादत व्यर्थ नहीं जाएगा.
भारत किसी भी देश को करारा जवाब देने के लिये सक्षम है. हालांकि भारत और चीन के बीच करीब 5 दशक के बाद संघर्ष हुआ है,जिसमें भारतीय सेना की जान गई है.

