BnnBharat | bnnbharat.com |
  • समाचार
  • झारखंड
  • बिहार
  • राष्ट्रीय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • औषधि
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स
  • स्वास्थ्य
No Result
View All Result
  • समाचार
  • झारखंड
  • बिहार
  • राष्ट्रीय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • औषधि
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स
  • स्वास्थ्य
No Result
View All Result
BnnBharat | bnnbharat.com |
No Result
View All Result
  • समाचार
  • झारखंड
  • बिहार
  • राष्ट्रीय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • औषधि
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स
  • स्वास्थ्य

ट्रेड वार और कोल्ड वार के बीच ताल ठोकता भारत

by bnnbharat.com
February 25, 2020
in समाचार
ट्रेड वार और कोल्ड वार के बीच ताल ठोकता भारत

ट्रेड वार और कोल्ड वार के बीच ताल ठोकता भारत

Share on FacebookShare on Twitter

नई दिल्‍लीः यदि विश्व को दो खेमें में बांटा जाए तो एक ध्रुव रूस होगा तो दूसरा होगा अमेंरिका. प्रथम विश्वयुद्ध से ही इन दोनो महाशक्तियों के बीच वर्चस्व की लड़ाई ने विश्व को द्वीतीय विश्व युद्ध में झोंक दिया. आज हालात ये है कि एक अधोषित युद्ध इन देनो महाशक्तियों के बीच निरंतर चली आ रहा है. आजादी के बाद से ही रूस और भारत के संबंध मित्रवत रहे जिसके कारण अमेरिका से संबंध कड़वे हो गए .

एक समय एसा भी था जब  अमेरिका भारत के खिलाफ अपना सातवां जंगी बेड़ा भेजा था . फिर विश्व की राजनीति ने करवट ली और आज अमेरिका के राष्‍ट्रपति डॉनल्‍ड राष्‍ट्रपति अपने मित्र भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने के लिए गुजरात पहुंच गए हैं.

ऐसे समय में जब विश्‍व की दो महाशक्तियों अमेरिका और रूस में ‘शीतयुद्ध’ जैसे हालात बने हुए हैं. ये कहना गलत नही होगा पीएम मोदी अपनी पर्सनल केमेस्‍ट्री से दोनों को बखूबी साध रहे हैं. यह पीएम मोदी की कूटनीति सूझबूझ का परिणाम है कि भारत जहां रूस से एस-400 खरीद रहा है, वहीं अमेरिका से ‘रोमियो’ खरीद चीन की चुनौती से निपट रहा है.

आज हम जानेंगे कि किस तरह  पीएम मोदी  ट्रंप और पुतिन दोनों के लिए बड़ी जरूरत बन गए हैं. विश्‍लेषकों के मुताबिक पेशे से व्‍यापारी ट्रंप ऐसे ही पीएम मोदी के साथ दोस्‍ती नहीं बढ़ा रहे हैं. ‘अमेरिका फर्स्‍ट’ का नारा देकर सत्‍ता में आए डॉनल्‍ड ट्रंप इन दिनों चीन के साथ ट्रेड वॉर में हैं.

अमेरिका में जल्‍द ही चुनाव होने वाले हैं. उनकी नजर भारतीय मूल के मतदाताओं वोटों के साथ- साथ भारत के साथ ट्रेड डील पर है. ट्रंप चाहते हैं कि दोस्‍त मोदी अपने बाजार को अमेरिकी उत्‍पादों के लिए पूरी तरह से खोल दें. इससे ट्रंप को यह फायदा होगा कि वह अपनी जनता को बता सकेंगे कि भारत के साथ ट्रेड बढ़ेगा और उनका फायदा होगा.

भारत और अमेरिका के बीच 142 अरब डॉलर व्‍यापार होता है. यह व्‍यापार भारत के पक्ष में झुका हुआ है. यही नहीं दो हजार अमेर‍िकी कंपनियां यहां भारत में काम कर रही हैं. भारत की भी करीब 200 कंपनियां अमेर‍िका में काम कर रही हैं.

भारत दुनिया का सबसे बड़ा हथियार खरीदार है और अमेरिका विश्‍व का सबसे बड़ा हथियार निर्यातक है. वर्ष 2008 में भारत और अमेरिका के बीच जहां रक्षा व्‍यापार शून्‍य था वहीं वर्ष 2019 में यह बढ़कर करीब 18 अरब डॉलर हो गया है.

करीब 7 अरब डॉलर के रक्षा समझौते इन दिनों पाइपलाइन में चल रहे हैं. भारत अमेरिका से तोप लेकर हवाई रक्षा प्रणाली तक खरीद रहा है. परंपरागत रूप से भारत रूस से हथियार खरीदता रहा है लेकिन अब अमेरिका रूस के इस बड़े बाजार पर अपना कब्‍जा जमाना चाहता है.

इससे ट्रंप को दो फायदा होगा. एक तो वह अपने शत्रु देश रूस की अर्थव्‍यवस्‍था को कमजोर करेंगे वहीं अपने देश में रक्षा कंपनियों को काम दिलाएंगे. इससे अमेरिकी रक्षा कंपनियां अमेरिका में रोजगार देंगी. अमेरिका जल्‍द ही तालिबान के साथ डील करने जा रहा है.

इस डील के बाद अमेरिका अफगानिस्‍तान से लड़ाई लड़ने की भूमिका से हट जाएगा. विश्‍व के नक्‍शे पर अफगानिस्‍तान सामरिक रूप से बहुत अच्‍छी महत्‍वपूर्ण जगह पर है, इसलिए अमेरिका वहां अपना सैन्‍य अड्डा बरकरार रखेगा.

अमेरिका के न‍िशाने पर ईरान और मध्‍य एशिया है. अमेरिका तालिबान की मदद से ईरान को न‍ियंत्रित करना चाहता है. अमेरिका मध्‍य एशियाई देशों तुर्कमेनिस्‍तान, किर्गिस्‍तान, उज्‍बेकिस्‍तान, कजाखिस्‍तान जैसे देशों से एक बड़ी गैस पाइपलाइन अफगानिस्‍तान के रास्‍ते अरब सागर तक लाना चाहता है.

उसे उम्‍मीद है कि शांति समझौते के बाद तालिबान इसमें उसकी मदद करेगा. अमेरिका की कोशिश है कि इस गैस पाइपलाइन की मदद से मध्‍य एशियाई देशों से चीन और रूस के प्रभाव को खत्‍म कर दिया जाए.अमेरिका ईरान और मध्‍य एशिया में उसकी योजनाओं को लागू करने में भारत की मदद चाहता है.

अब बात करें रूस की तो पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के समय से ही रूस की सियासत पर प्रत्‍यक्ष या अप्रत्‍यक्ष रूप से अपना नियंत्रण रखने वाले व्लादिमीर पुतिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत के मुरीद हैं. रूस इन दिनों बदलाव के दौर से गुजर रहा है और भारत भी बहुत तेजी से विकास की ओर अग्रसर है.

ऐसे में दोनों ही देशों को कई क्षेत्रों में एक-दूसरे के मदद की सख्‍त जरूरत है. इसी वजह से आजादी के दिनों से चली आ रही भारत और रूस की दोस्‍ती प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में और ज्‍यादा प्रगाढ़ हुई है. पुतिन और मोदी की दोस्‍ती तब से है जब पीएम मोदी पहली बार वर्ष 2001 में गुजरात के सीएम रहने के दौरान रूस गए थे.

पुतिन ने उनका बहुत गर्मजोशी से स्‍वागत किया था. इसी दोस्‍ती का नजारा पीएम मोदी की पिछले साल रूस यात्रा में देखने को मिला था. पूर्वी आर्थिक मंच की बैठक में पीएम मोदी को रूस ने मुख्‍य अतिथि बनाया था. रूस पहुंचने पर पुतिन ने गले लगाकर पीएम मोदी का स्वागत किया था.

भारत को इस समय ऊर्जा और हथियार समेत अत्‍याधुनिक तकनीक की सख्त जरूरत है और यह रूस के लिए एक सुनहरे अवसर की तरह से है. विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के साथ-साथ रूस को भी भारत के सहयोग की बेहद जरूरत है.

रूस अपने सुदूरवर्ती पूर्वी इलाके का विकास करना चाह रहा है जहां पर चीनी मूल के लोगों की संख्‍या रूसी मूल के लोगों से ज्‍यादा हो गई है. रूस इस इलाके में निवेश बढ़ाकर अपने मूल निवासियों को वहां जाने के लिए प्रेरित करना चाह रहा है.

भारत रूस के इस काम में मदद कर रहा है. भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए रूस के इस इलाके में निवेश का इच्‍छुक भी है. भारत ने अपनी ‘ऐक्‍ट फॉर ईस्‍ट’ पॉलिसी के तहत रूस को एक अरब डॉलर का क्रेडिट लाइन दिया है.

यही नहीं साइबेरियाई इलाके के विकास के लिए रूस को जरूरी श्रम शक्ति में भी भारत से मदद मिल सकती है. भारत के पास श्रम शक्ति की अधिकता है और रूस इसे बखूबी पहचानता है. प्राकृतिक संसाधनों से लैस इस इलाके पर चीन ने भी अपनी नजरें गड़ाई हुई हैं.

इन दिनों चीन और रूस में दोस्‍ती काफी प्रगाढ़ हुई है लेकिन रूस अभी भी साइबेरिया की सुरक्षा को लेकर महाशक्ति बनने की ओर तेजी से अग्रसर चीन से आशंकित है.  इसी आशंका को देखते हुए रूस ने भारत को परमाणु पनडुब्‍बी दी है जिससे भारत की नेवी चीन के नजदीक तक आसानी से पहुंच सकती है.

यह मोदी और पुतिन की दोस्‍ती ही थी कि अमेरिका के तमाम दबाव के बावजूद भारत रूस से हथियारों की खरीद जारी रखे हुए है. भारत ने हाल ही में रूस से एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्‍टम खरीदा है. दोनों देशों ने करीब 14.5 अरब डॉलर की रक्षा डील को अपनी सैद्धांतिक मंजूरी दी है.

विश्‍लेषकों के मुताबिक अमेरिका, रूस और चीन जहां वैश्विक महाशक्ति हैं वहीं भारत और जापान किसी भी युद्ध में पासा पलट सकते हैं.

रूस की अर्थव्‍यवस्‍था जहां लगातार कमजोर हो रही है वहीं भारत लगातार तेजी से आगे बढ़ रहा है.जीडीपी के ल‍िहाज से भारत जहां पांचवें स्‍थान पर है, वहीं रूस 12वें नंबर पर है. भारत और रूस अपने द्विपक्षीय व्‍यापार को अब वर्ष 2025 तक 30 अरब डॉलर तक ले जाना चाहते हैं.

Share this:

  • Click to share on Facebook (Opens in new window)
  • Click to share on X (Opens in new window)

Like this:

Like Loading...

Related

Previous Post

उकसाने वाले नेताओं पर भी कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए : गौतम गंभीर

Next Post

शेयर बाजार में उतार चढ़ाव, सेंसेक्स में 0.08 फीसदी की तेजी

Next Post
शेयर बाजार में उतार चढ़ाव, सेंसेक्स में 0.08 फीसदी की तेजी

शेयर बाजार में उतार चढ़ाव, सेंसेक्स में 0.08 फीसदी की तेजी

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

  • Privacy Policy
  • Admin
  • Advertise with Us
  • Contact Us

© 2025 BNNBHARAT

No Result
View All Result
  • समाचार
  • झारखंड
  • बिहार
  • राष्ट्रीय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • औषधि
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स
  • स्वास्थ्य

© 2025 BNNBHARAT

%d