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डायन प्रथा जैसी कुरीतियों पर अंकुश लगाने की जरूरत, लोगों को करें जागरूकः उपायुक्त

by bnnbharat.com
March 18, 2021
in समाचार
25 मामलों में मुआवजा भुगतान का निर्देश
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मेदिनीनगर:- महिला बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग की ओर से डायन प्रथा उन्मूलन जागरूकता सेमिनार का आयोजन आज दिनांक 18 मार्च 2021 को पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर स्मृति भवन में किया गया. जिला समाज कल्याण कार्यालय के द्वारा आयोजित किए गए इस कार्यक्रम को उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक तथा उप विकास आयुक्त ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया. 

मौके पर उपायुक्त ने कहा कि डायन प्रथा एक अंधविश्वास है जो समाज के लिए अभिशाप है. यह एक ऐसी कुप्रथा है जिससे पूरा राज्य प्रभावित है, हमें ऐसी कुरीतियों पर अंकुश लगाने की आवश्यकता है. उपायुक्त ने कहा कि डायन प्रथा को सामाजिक जागरूकता के माध्यम से ही खत्म किया जा सकता है. ऐसी कुप्रथा से ना केवल महिलाओं में बल्कि समाज में भी नकारात्मक विचार धारा बन रही है. डायन उन्मूलन जागरूकता सेमिनार को हम सभी को गंभीरता से लेने की आवश्यकता है. लोगों को जागरूक करने की जरूरत है. उन्होंने बताया कि हम सभी 21 वीं शताब्दी में हैं. हमें जरूरत है विकास की ना कि इन अंधविश्वासी कुप्रथा की.

पुलिस अधीक्षक   संजीव कुमार ने कहा कि अक्सर केस सुलझाने के सिलसिले में विभिन्न स्थानों पर जाना पड़ता है. लोग कमजोर अथवा असहाय महिलाओं को डायन बताकर उन्हें प्रताड़ित करते हैं. इस कुप्रथा के कारण कई बार स्थिति भयावह हो जाती है, लोगों की जान भी चली जाती है. उन्होंने बताया कि इन सभी घटनाओं में किसी ना किसी का स्वार्थ छुपा रहता है. हमें जरूरत है वैसे लोगों को चिन्हित करने की जो अपने स्वार्थ में सामने वाले को डायन बता कर उनका और उनके परिवार का उत्पीड़न कर रहे हैं. उन्होंने कार्यक्रम में शामिल महिला प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार एवं पूरा सिस्टम इस कुप्रथा को समाज से हटाने में जुटा हुआ है हमें जरूरत है आप सभी अपने घर, गांव तथा प्रखंड के लोगों को जागरूक करें.

उप विकास आयुक्त श्री शेखर जमुआर ने सेमिनार में मौजूद सभी महिलाएं से कहा कि इस विषय को लोगों तक पहुंचाएं और लोगों को जागरूक करें क्योंकि हमारे लिए विकास के इस दौर में डायन- बिसाही जैसे मामलों को भी खत्म करने की चुनौती है. डायन के नाम पर महिलाओं को प्रताड़ित करना एक अशिक्षित समाज को दर्शाता है. उन्होंने सेमिनार में मौजूद सभी महिलाओं से कहा कि आप अपने अपने गांव, प्रखंड में जाकर लोगों के बीच यह जागरूकता संदेश दे कि डायन बताकर महिलाओं या उनके परिवार को मारना या प्रताड़ित करना दंडनीय अपराध है. यह सिर्फ एक अंधविश्वास है और कुछ नहीं.

कार्यक्रम के दौरान तेजस्विनी परियोजना की बालिकाओं ने डायन-बिसाही विषय पर नाटक की प्रस्तुति की और वहां मौजूद लोगों को इस विषय के बारे में जागरूक किया. बताते चलें कि जिले को डायन प्रथा जैसे अंधविश्वास से मुक्ति दिलाने के उद्देश्य से जिले में जागरूकता रथ को भी रवाना किया गया था. 

कार्यक्रम में उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी श्री शशि रंजन पुलिस अधीक्षक श्री संजीव कुमार, उप विकास आयुक्त श्री शेखर जमुआर, श्रीमती प्रभा देवी, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी श्रीमती नीता चौहान, श्रीमती स्नेहलता, सभी सीडीपीओ सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद थे.

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