रांची: राज्य सरकार द्वारा भवन निर्माण विभाग में 25 करोड़ रुपये तक के कार्य स्थानीय ठेकेदारों को दिए जाने के निर्णय का बिल्डर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, झारखंड सेंटर ने स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री को पत्राचार कर इसके निर्धारित प्रावधानों में सुधार का आग्रह किया है. यह आपत्ति जताई गई कि इसमें अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, बीसी 1, बीसी 2 के सदस्यों को वरीयता देने के प्रावधान अनुचित प्रतीत होते हैं. यदि उपरोक्त मानदंड व्यवहार में आते हैं तो सामान्य वर्ग के संवेदकों को एक भी कार्यादेश नहीं मिलेगा, जिसपर सरकार को चिंतन करने की आवश्यकता है.
बिल्डर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के चेयरमैन रोहित अग्रवाल ने कहा कि कृषि के बाद निर्माण क्षेत्र ही रोजगार का सर्वाधिक अवसर प्रदान करता है. ऐसे कठिन समय में जब देश महामारी से जूझ रहा है और राज्य ट्रेजरी से भुगतान भी नहीं हो रहे हैं, के दौरान निर्माण क्षेत्र से जुडे वस्तुओं के आपूर्तिकर्ताओं के साथ ही असंख्य श्रमिकों की जीविका संवेदक समुदाय ही चला रहा है. हम महसूस करते हैं कि जाति के आधार पर समान दरों के लिए निविदा को अंतिम रूप देना शत प्रतिशत आरक्षण की तरह ही है.
यह देखें तो वर्तमान समय तक अधिकांश विभाग पिछले कार्य आवंटन, कार्यानुभव, पंजीकरण और टर्नओवर आदि के निर्धारित मापदंडों के आधार पर Estimate/BOQ से 10% below दर पर निविदाएं प्राप्त करते हैं एवं कार्य आवंटित किए जाते हैं. यदि उपरोक्त मानदंड व्यवहार में आते हैं तो सामान्य वर्ग को एक भी काम नहीं मिलेगा. यह सुझाया गया कि यदि सरकार अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति श्रेणियों के संवेदकों के उत्थान में रुचि रखती है तो ऐसे प्रावधानों को छोटी निविदाओं के संबंध में शामिल किया जा सकता है जहां ऐसी निविदाओं के निष्पादन के लिए कम कार्यानुभव और विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है.
यह भी कहा गया कि नागरिकों को समान अवसर देना भारतीय संविधान की धारा 14 व 15 की मूल भावना है जिसका ध्यान इस निर्णय में नहीं रखा गया है. उच्च मूल्य की निविदाओं में संवेदकों के अनुभव और उनकी विशेषज्ञता को ध्यान में रखकर ही प्राथमिकता देनी चाहिए.
बिल्डर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया को यह आशंका है कि सरकार के वर्तमान निर्णय से सामान्य श्रेणी के संवेदक जो वर्षों से सरकार की सेवा कर रहे हैं, वे इस व्यवसाय से बाहर हो जाएंगे और कई झारखण्डी जो इन संवेदकों के साथ मिलकर अपना जीवनयापन करते हैं, उनके पास आमदनी के सारे विकल्प समाप्त हो जाएंगे.
यह आग्रह किया गया कि सरकार द्वारा भवन निर्माण के लिए निर्धारित मापदंडों पर पुनर्विचार किया जाय, ताकि किसी भी प्रतिस्पर्धा में अवसरों को सीमित न रखा जा सके.

