रांची: वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की ओर से रांची आज से ईस्टर्न रीजनल मीटिंग ऑन बॉयोलोजिकल रिवाइवल ऑफ साल फॉरेस्ट विषय पर दो दिवसीय सेमिनार शुरू हो गया है. सेमिनार में भारत सरकार के कई वरीय अधिकारियों के साथ झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिसा, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ के वन विभाग के अधिकारी उपस्थित थे. सेमिनार में भरतीय वन अनुसंधान केन्द्र, सी. सी. एल, बी. सी. सी एल, सेल, और ई. सी. एल के अधिकारी भी उपस्थित थे.
पत्रकारों से बातचीत में झारखंड के प्रधान मुख्य वन संरक्षक डॉक्टर संजय कुमार ने कहा कि पर्यावरण को बचाने के लिये साल वन छेत्र को बचाने की जरूरत है. उन्होने कहा कि साल वन छेत्र में कमी होने का सबसे बुरा असर ईको सिस्टम पर पड़ेगा. नदियों के जल स्तर और जल की गुणवत्ता पर भी असर दिखने लगेगा.
कुमार ने कहा कि भविष्य की चुनौतियों से निबटने के लिए हमे अभी से तैयार होना होगा. एक प्रश्न के उत्तर में प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने कहा कि मॉनसून के दौरान झारखंड में बड़े पैमाने पर वृक्ष लगाए गए हैं. यह आंकड़ा लगभग 2 करोड़ को पार कर गया है.

