यूपी(बरेली): सरकारी मुलाजिमों की कार्यशैली के भी क्या कहने. भले ही लोगों की जान चली जाए लेकिन इनके कान पर जूं तक नहीं रेंगती, ऐसी ही एक घोर अनियमितता शुक्रवार को डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल में सामने आई.
बता दें कि दो घंटे तक परिजन अपने पेशेंट को लेकर हॉस्पिटल में इधर से उधर भटकते रहे, लेकिन स्टाफ ने भर्ती करना तो दूर पेशेंट को प्राइमरी ट्रीटमेंट तक नहीं दिया. लंबा समय गुजरने के बाद आखिरकार मरीज की जान चली गई.
जानकारी के अनुसार, थाना बिथरी चैनपुर के श्याम नगर गौटिया निवासी 30 वर्षीय बाबू को हाइड्रोसील की प्राब्लम थी. शुक्रवार को उसकी तबियत घर पर बिगड़ी तो परिजन सुबह करीब 11 बजे उसे लेकर डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल के इमरजेंसी पहुंचे, जहां ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर ने पेशेंट को भर्ती करना तो दूर उसकी जांच तक करने की जहमत नहीं उठाई.
परिजनों ने कई बार डॉक्टर्स से भर्ती करने की गुहार लगाई, लेकिन किसी के कान पर जूं तक नहीं रेंगी. वहीं हालत गंभीर होने के बाद भी मरीज को स्ट्रैचर तक मुहैया नहीं कराया गया. इस हीलाहवाली के चलते करीब एक बजे युवक की सांसे थम गई.

