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नेहरु ने जम्मू कश्मीर पर थोपा था 370 का कलंक : जुगल किशोर शर्मा

by bnnbharat.com
August 6, 2019
in समाचार
नेहरु ने जम्मू कश्मीर पर थोपा था 370 का कलंक : जुगल किशोर शर्मा

Nehru imposes Article 370 stigma on Jammu and Kashmir: Jugal Kishore Sharma

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जम्मू कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने वाला जम्मू कश्मीर पुनर्गठन बिल राज्यसभा में पास हो गया. इसके पक्ष में 125 और विरोध में 61 वोट पड़े.

आज मंगलवार को यह बिल लोकसभा में पेश किया गया.लोकसभा में भाजपा के जम्मू कश्मीर के जुगल किशोर शर्मा ने कहा

“नेहरु ने धारा 370 का कलंक जम्मू-कश्मीर पर थोपा है. नेहरु ने ही जम्मू को तोड़ा है और पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) नेहरु की देन है.”

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उन्होंने कहा कि “धारा 370 ने जम्मू-कश्मीर को बेरोजगारी और आंतकवाद दिया है. यहा पर कोई कारखाना नहीं लगवाता. व्यापारी व्यापार करने के लिए वहां जमीन नहीं खरीद सकता है.”

उन्होंने कहा कि “माता बहनों को भी रोजगार नहीं मिलता है और तो और जम्मू-कश्मीर के लोग आयुष्मान योजना से भी वंचित रह जाते है. जेनरल कास्ट के लिए 10 फीसदी का आरक्षण भी लागू नहीं हो पाया है.”

उन्होंने ने ये भी बोला कि जम्मू-कश्मीर के हॉस्पीटल में कोई डॉक्टर जाने को तैयार नहीं है, क्योंकि जो भी बाहरी जाएंगे वो वहां के कॉलेज में नहीं पढ़ा सकते. और वे वहां रह भी नहीं सकते तो ऐसे में कौन जम्मू-कश्मीर जाएगा, और ऐसे में कैसे विकास होगा. इसलिए धारा 370 को हटाना जरुरी है.

कश्मीर पंडित के बारे में कहा कि :

शर्मा ने कहा “कश्मीरी पंडित के लिए भूमि जन्म जननी होती है और कश्मीरी पंडित को कुछ भी दे दीजीए लेकिन जबतक उनकी जन्म भूमि नहीं मिलेगी उनको चैन नहीं मिलेगा.”

विस्थापित कश्मीरी पंडित कहते हैं कि कश्मीर एक सुलझा हुआ मुद्दा है और पाकिस्तान के साथ चर्चा उन क्षेत्रों को खाली करने को लेकर होनी चाहिए जिस पर उसने ‘अवैध’ तरीके से कब्जा कर रखा है और उन लोगों को पकड़कर जेल में डालना चाहिए जो अलगाववाद और आतंकवाद का समर्थन करते हैं. यदि धार्मिक आधार पर कश्मीरी पंडितों को मारकर खदेड़ा गया तो क्यों नहीं धार्मिक आधार पर पनुन कश्मीर की मांग की जाए? यदि धार्मिक आधार पर ही आजाद कश्मीर की मांग की जा रही है तो क्यों नहीं पनुन कश्मीर की मांग की।

कश्मीरी पंडित अपनी पवित्र भूमि से बेदखल हो गए हैं और अब अपने ही देश में शरणार्थियों का जीवन जी रहे हैं. पिछले 26 वर्षों से जारी आतंकवाद ने घाटी के मूल निवासी कहे जाने वाले लाखों कश्मीरी पंडितों को निर्वासित जीवन व्यतीत करने पर मजबूर कर दिया है. ऐसा नहीं है कि पाक अधिकृत कश्मीर और भारतीय कश्मीर से सिर्फ हिंदुओं को ही बेदखल किया गया. शिया मुसलमानों का भी बेरहमी से नरसंहार किया गया.

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