दिल्ली: देश में महामारी कोरोना के संकट काल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हर कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे है और एक के बाद एक बड़ी सौगात दे रही है. अब आज 29 दिसंबर को ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्वी समर्पित फ्रेट कॉरिडोर (EDFC) के “न्यू भूपुर-नई खुर्जा” खंड का उद्घाटन किया और उत्तर प्रदेश को बड़ी सौगात दी है.
ईडीएफसी का 351 किलोमीटर लंबा नया भूपुर-नई खुर्जा खंड उत्तर प्रदेश में स्थित है और इसे 5,750 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है. तो वहीं, EDFC के न्यू भूपुर-नई खुर्जा खंड देश को समर्पित किया है. इस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा- आज का दिन भारतीय रेल के गौरवशाली अतीत को 21वीं सदी की नई पहचान देने वाला है. भारत और भारतीय रेल का सामर्थ्य बढ़ाने वाला है. आज हम आजादी के बाद का सबसे बड़ा और आधुनिक रेल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट धरातल पर उतरता देख रहे हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि, ”प्रयागराज में ऑपरेशन कंट्रोल सेंटर भी नए भारत के नए सामर्थ्य का प्रतीक है. ये दुनिया के बेहतरीन और आधुनिक कंट्रोल सेंटर में से एक है. इसमें मैजेनमेंट और डेटा से जुड़ी जो तकनीक है, वो भारत में ही तैयार हुई है. आज जब भारत दुनिया की बड़ी आर्थिक ताकत बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, तब बेहतरीन कनेक्टिविटी देश की प्राथमिकता है. इसी सोच के साथ बीते 6 साल से देश में आधुनिक कनेक्टिविटी के हर पहलू पर फोकस के साथ काम किया जा रहा है.”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीहमारे यहां यात्री ट्रेन और मालगाड़ियां दोनों एक ही पटरी पर चलती हैं. मालगाड़ी की गति धीमीं होती है, ऐसे में मालगाड़ियों को रास्ता देने के लिए यात्री ट्रेनों को स्टेशनों पर रोका जाता है. इससे यात्री ट्रेन भी लेट होती है और मालगाड़ी भी. ये फ्रेट कॉरिडोर आत्मनिर्भर भारत के बहुत बड़े माध्यम होंगे. उद्योग हों, व्यापार-कारोबार हों, किसान हों या फिर कंज्यूमर, हर किसी को इसका लाभ मिलने वाला है.
PMमोदी ने आगे कहा- विशेष तौर पर औद्योगिक रूप से पीछे रह गए पूर्वी भारत को ये फ्रेट कॉरिडोर नई ऊर्जा देने वाला है. इसका करीब 60% हिस्सा उत्तर प्रदेश में है, इसलिए यूपी के हर छोटे बड़े उद्योग को इसका लाभ होगा.
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा कही गई बातें :
- कल ही देश में 100वीं किसान रेल शुरु की गई है. किसान रेल से वैसे भी खेती से जुड़ी उपज को देशभर के बाजारों में सुरक्षित और कम कीमत पर पहुंचाना संभव हुआ है. अब किसान रेल और भी तेजी से अपने गंतव्य पर पहुंचेगी.
- इस परियोजना को पिछले सरकार के शासनकाल के दौरान 2006 में अनुमोदित किया गया था. यह 2014 तक केवल कागजों में मौजूद था. 2014 के पूर्व के केंद्र सरकार ने आवश्यक तात्कालिकता वाले राज्यों के साथ बात नहीं की. 2014 तक रेलवे लाइनों का 1 किमी ट्रैक भी नहीं बिछाया गया था.
- भारत न केवल आधुनिक ट्रेनें बना रहा है, बल्कि उनका निर्यात भी कर रहा है. पिछले 6 वर्षों में, रायबरेली की मॉडर्न कोच फैक्ट्री ने 5,000 से अधिक नए रेलवे कोच बनाए हैं और निर्यात भी उसी से किया जा रहा है.
- 2014 से पहले इस परियोजना के लिए जो पैसा भी स्वीकृत हुआ, वो सही तरीके खर्च नहीं हो पाया. 2014 में इस परियोजना के लिए फिर से फाइलों को खंगाला गया. अधिकारियों को नए सिरे से आगे बढ़ने के कहा गया, तो बजट करीब 45 गुना बढ़ गया.
- पहले फोकस ट्रेनों की संख्या बढ़ाने पर रहता था, ताकि चुनावों में इसका लाभ मिले. लेकिन जिन पटरियों पर इन ट्रेनों को चलाना था, उन पर निवेश ही नहीं होता था.
- जो हम प्रदर्शनों और आंदोलनों में देखते हैं. ये मानसिकता देश की संपत्ति और इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचाने की है. हमें याद रखना चाहिए ये संपत्ति किसी नेता या दल की नहीं, देश की है. समाज के हर वर्ग का इसमें पसीना लगा है.

