बंगलुरु: यातायात के नियम सड़क पर चलेने वालों की सुरक्षा के लिए बनाए गए हैं. ये नियम उन लोगों की ही सुरक्षा करते हैं जो सड़कों पर चलते हैं. लेकिन देखा जाता है कि लोग अक्सर इन नियमों को तोड़ते हैं. रेड लाइट जंप करना. सीट बेल्ट लगाए बिना कार चलाना और मोबाइल पर बात करते हुए बाइक या कार चलाना कोई अनोखी बात नहीं है.
कर्नाटक की राजधानी बंगलुरु में ये समस्या और बड़ी है. लंबे-लंबे ट्रैफिक जाम झेलने वाले इस शहर में ट्रैफिक नियमों की अनदेखी भी बहुत होती है. इससे बचने के लिए बंगलुरु की ट्रैफिक पुलिस ने एक नया क़दम उठाया है.
पुलिस को उम्मीद है कि उसके इस क़दम से लोग ट्रैफिक के नियम कम तोड़ेंगे. असल में बंगलुरु पुलिस ने फ़ैसला लिया है कि सड़कों पर या व्यस्त चौराहों पर पुतलों को पुलिस की वर्दी पहनाकर लगाया जाएगा. इससे आने-जाने वालों को लगेगा कि ट्रैफिक पुलिस का जवान खड़ा है. इसे देखकर वो नियम तोड़ने से डरेंगे.
खबर के मुताबिक शुरू में बंगलुरु पुलिस ने शहर में 30 पुतलों को ट्रैफिक पुलिस की वर्दी में अलग-अलग स्थानों पर खड़ा किया है. पुलिस का मानना है कि ऐसा करने से लोग ट्रैफिक नियमों का पालन करेंगे. इन पुतलों को रिफ्लेक्टर जैकेट, सफेद शर्ट, खाकी पैंट्स, टोपी और काले जूते पहना कर शहर की अलग-अलग जगहों पर खड़ा किया गया है. समय-समय पर इनकी जगह को बदल दिया जाता है ताकि लोगों को इसकी आदत न हो.
बता दें, 1 करोड़ 20 लाख की आबादी वाले शहर बंगलुरु की सड़कों पर करीब 71 लाख वाहन दौड़ते हैं. इनसे ट्रैफिक पुलिस हर साल एक करोड़ से एक करोड़ 5 लाख रुपये तक का चलान वसूलती है.
पुलिस का कहना है कि उसकी प्राथमिकता चलान वसूलने की जगह दुर्घटनाओं को रोकना है. ऐसे में जब भी कोई नया आइडिया सामने आता है पुलिस उसे अपनाती है.
अंग्रेज़ी अख़बार ‘इंडियन एक्सप्रेस’ के मुताबिक पुतलों का इस्तेमाल केवल दिन के वक्त किया जाता है. रात में इन पुतलों को हटा लिया जाता है.
बंगलुरु पुलिस के इस पहल की ट्विटर पर कुछ लोग सराहना कर रहे हैं तो कुछ इस पर अलग-अलग तरह से रिएक्ट कर रहे हैं.
हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब पुलिस ने इस तरह का कोई कदम उठाया है. बंगलुरु पुलिस हमेशा किसी न किसी तरीके से लोगों को ट्रैफिक रूल्स के प्रति जागरुक करती रहती है.

