नीता शेखर( समाज सेवी),
रांचीः आज देश गंभीर संकट से जूझ रहा है. इसकी सबसे अधिक मार गरीब मजदूरों पर पड़ी है. दाने-दाने को मोहताज हो गए हैं. दो जून की रोटी भी उन्हें नसीब नहीं हो पा रही.
कहीं भी किसी जगह खुले आसमां के नीचे उम्मीद की किरण तलाशते नजर आ रहे हैं. की कल नया सवेरा तो आएगा. फिर से कामकाज पटरी पर लौट जाएगी.
हालांकि सरकारी और गैर सरकारी संगठनों ने मदद के लिए हाथ तो बढ़ाया है लेकिन यह नाकाफी है. इसके लिए सभी को सामने आना होगा. क्योंकि अर्थ व्यवस्था की रीढ़ हमारे मजदूर और किसान ही हैं.
निचला तबका सबसे अधिक प्रभावित
लॉक डाउन के दौरान गरीब और निचला तबका सीधे तौर पर प्रभावित हुए है. हालांकि केंद्र सरकार और कई राज्य सरकारों ने भी इस वर्ग के लिए कई तरह से मदद करने की पेशकश की है, लेकिन बावजूद इसके इस प्रभाव से सीधे उबर पाना इतना आसान नहीं होगा.
दिहाड़ी मजदूर जो अपनी दैनिक कमाई पर ही मुख्यता आश्रित रहते हैं, ऐसे में 21 दिनों तक बिना कमाई के रहना उनके लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है. हालांकि किसानों के लिए केंद्र सरकार अप्रैल के पहले हफ्ते में ही पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत उनके खातों में मदद राशि पहुंचाने का काम शुरू कर देगी.
इसी के साथ कई राज्य सरकारों ने भी दिहाड़ी मजदूरों की मदद के लिए अपने कदम आगे बढ़ाते हुए उनके खातों में मदद राशि भेजने का आश्वासन दिया है.
फिर से व्यवसाय खड़ा करना भी होगी चुनौती
देश की 65 से 70 प्रतिशत अर्थव्यवस्था असंगठित है, ऐसे में लॉकडाउन से सबसे अधिक प्रभाव रेहड़ी वाले और ऑटो ड्राइवर जैसे लोगों पर पड़ा है. इनके लिए वापस से अपने व्यवसाय को खड़ा करना एक चुनौती होगा.
लॉकडाउन के चलते होटल, टूरिज़्म, लॉजिस्टिक और एविएशन इंडस्ट्री को बुरी चोट पहुंची है. लॉकडाउन के दौरान कृषि क्षेत्र के प्रभावित होने की संभावना है.
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किसानों की फसलें, खास कर गेंहू फसल अब लगभग कटने को तैयार है, ऐसे में यह लॉकडाउन फसल के इस आखिरी समय में किसानों को परेशान कर सकता है. इसी के साथ फल और सब्जी उगाने वाले किसानों के लिए इस लॉकडाउन ने बड़ा झटका दिया है, जिससे उबरना उनके लिए किसी चुनौती से कम नहीं होगा.
यह भी हो सकती है बड़ी मुसिबत
लॉकडाउन के बीच लोगों का अधिक राशन जमा करके रखना और कीमतों के बढ़ जाने से गरीब तबका मुसीबत में आ सकता है. साथ ही ट्रांसपोटेर्शन की असुविधा होने से भी खाद्य सामग्री में कमी हो सकती है.
सबसे बड़ी मुसीबत यह है कि जहां भी खाद्य सामग्रियां स्टॉक में हैं वहां इस्तेमाल नहीं हो पाएंगी और इससे कालाबाजारी बढ़ जाएगी. जिसका सीधा असर गरीब जनता पर पड़ेगा. अब देखना यह है कि सरकार द्वारा राशन उपलब्ध कराने की सुविधा गरीब परिवारों तक पहुंचती है या नहीं.


