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TMH में बेड नहीं, MGM में भी बेड फुल, घर लौट गई मरीज

by bnnbharat.com
August 8, 2020
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TMH में बेड नहीं, MGM में भी बेड फुल, घर लौट गई मरीज
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जमशेदपुर: एमजीएम की एक कोरोना पॉजिटिव नर्स बेड के लिए एमजीएम से टीएमएच का चक्कर लगाती रही. तीन दिनों के बाद उन्हें बेड मिला. बेड तो मिल गया है, लेकिन डाॅक्टरों की कमी के कारण अभी उनका इलाज शुरू नहीं हो सका है.

देखिए… शहर के बड़े अस्पताल व नर्सिंग होम के हालात-

  1. ब्रह्मानंद अस्पताल : ब्रह्मानंद अस्पताल के तीन डॉक्टर सहित एक दर्जन कर्मचारी पॉजिटिव होने के बाद मरीजों को भर्ती नहीं लिया जा रहा है. वहीं, जो भर्ती हैं उन्हें छुट्टी दी जा रही है. इस अस्पताल में हार्ट, किडनी, कैंसर व मेडिसिन का इलाज होता है.
  2. मर्सी अस्पताल : बारीडीह मर्सी अस्पताल के डॉक्टर सहित अन्य कर्मचारी पॉजिटिव निकल चुके हैं. अस्पताल को बंद कर दिया गया था. लेकिन, अब खुलने के बाद सिर्फ उसी मरीज को भर्ती लिया जा रहा है जो कोरोना जांच कराकर पहुंच रहे हैं.
  3. सदर अस्पताल : सदर अस्पताल खुला है, लेकिन यहां हर दो दिन पर मरीज मिल रहे हैं. ओपीडी व इमरजेंसी दो घंटे के लिए बंद कर दिया जाता है और सैनेटाइज कर फिर खोला जाता है. महिला एवं प्रसूति विभाग बीते पांच दिनों से बंद है.
  4. एमजीएम अस्पताल : डॉक्टर सहित लगभग 70 कर्मचारी पॉजिटिव हैं. कोविड वार्ड में भर्ती छह में से चार डॉक्टर पॉजिटिव हैं. वहीं, अनुबंध पर तैनात 17 चिकित्सकों ने समय खत्म होने की वजह से आना बंद कर दिया है. यहां बेड खचाखच भरा हुआ है.

संतोष कुमार मिश्र, शहर में स्वास्थ्य सेवाओं की हालत बिगड़ती जा रही है. अब कोरोना मरीजों को भी बेड नहीं मिल रहा है. इसका प्रमुख कारण एमजीएम, टीएमएच समेत शहर के अन्य निजी अस्पतालों के 213 डाॅक्टर व स्वास्थ्य कर्मियों का कोरोना पॉजिटिव होना है.

मरीजों को हो रही परेशानी

बिष्टुपुर में रहने वाली एक पुजारी की पत्नी का ब्रह्मानंद में डायलिसिस चल रहा था. अस्पताल बंद होने से परिजनाें ने कई अस्पतालों में डायलिसिस के लिए संपर्क किया, लेकिन किसी ने डायलिसिस नहीं किया. अभी यह मरीज घर में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही है.

टीएमएच में बेड नहीं, एमजीएम में भी बेड फुल, घर लौट गई मरीज

सोनारी निवासी कोरोना संदिग्ध को टीएमएच में बेड नहीं मिला. दूसरे अस्पताल जाने को कहा गया. इसके बाद वह एमजीएम अस्पताल आई तो यहां भी बेड फुल बताया गया. इसके बाद वह घर लौट गई. अब उन्हें भगवान का ही सहारा है.

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