दिल्ली: भारत और चीन सीमा पर तनाव के बीच पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग त्सो झील इलाके में दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे की कड़ी निगरानी कर रही हैं. पिछले हफ्ते पैंगोंग झील के निकट दोनों पक्षों के लगभग 250 सैनिकों के बीच झड़प हुई थी. यह क्षेत्र भारतीय नियंत्रण में है और एक इंफैंट्री बटालियन यहां देख-रेख करती है हालांकि सूत्रों के अनुसार अतिरिक्त बल को भी तैयार रहने को कहा गया है.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबकि, इन तमाम घटनाक्रमों के बीच भारतीय सेना ने साफ किया है कि किसी तरह का सैन्य जमावड़ा लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर नहीं किया जा रहा है. सेना के प्रवक्ता कर्नल अमन आनंद ने कहा, “पांगोंग त्सो में अब टकराव के हालात नहीं हैं. क्षेत्र में सैनिकों की संख्या नहीं बढ़ाई गई है.”
सेना के प्रवक्ता ने बताया कि ‘वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर झड़प और आक्रामक रूख की घटनाएं हुई हैं. स्थानीय स्तर की बातचीत और संवाद के बाद ये गश्ती दलों का मतभेद दूर हो जाता है. सीमा के मामले का समाधान नहीं होने के कारण अस्थाई और अल्प अवधि के लिए झड़पें होती हैं.’
रिपोर्ट के मुताबिक, पांच मई को दोनों पक्षों के सैनिकों के बीच झड़प के बाद इलाके में सीमा के निकट चीन के कम से कम दो हेलीकॉप्टर उड़ान भरते देखे गए थे. इसके बाद भारतीय वायुसेना के दो सुखोई-30 लड़ाकू विमानों ने भी वहां उड़ान भरी.
हालांकि IAF के सूत्रों ने बताया कि सुखोई-30 लड़ाकू विमानों समेत अन्य विमानों ने नियमित उड़ा भरी थी. उन्होंने कहा कि चीन की ओर से भारतीय हवाई क्षेत्र का उल्लंघन नहीं किया गया.
भारतीय वायुसेना के लेह और थोईस एयरबेस सहित लद्दाख क्षेत्र में दो एयरबेस हैं, जहां लड़ाकू विमान स्थायी रूप से तैनात नहीं हैं, लेकिन लड़ाकू विमान स्क्वाड्रन की एक टुकड़ी साल भर यहां परिचालन की स्थिति में रहती है. इससे पहले भी कई मौकों पर चीनी सैन्य हेलीकॉप्टरों ने लद्दाख सेक्टर में भारतीय हवाई क्षेत्र में प्रवेश किया है.

